रविवार से फरवरी महीने की शुरुआत हो जाएगी. यह महीना और मार्च का शुरुआती हिस्सा सभी बच्चों के एग्जाम्स का दौर होता है. चाहे मैट्रिक बोर्ड का एग्जाम हो, इंटरमीडिएट का एग्जाम हो या छोटे बच्चों का, सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में इस समय एग्जाम होते हैं. ऐसे में बच्चों का दिमागी प्रेशर इस महीने में बढ़ा रहता है. अक्सर देखा जाता है कि परीक्षा के वक्त बच्चे काफी ज्यादा टेंशन में रहते हैं. वहीं, जिस तरह मोबाइल की आदत छोटे से बड़े बच्चों में लग गई है, उन्हें मोबाइल से दूर रखने पर उनका दिमागी संतुलन भी बिगड़ जाता है. ऐसे में बच्चों को खुश रखने से लेकर उन्हें टेंशन फ्री रखने तक और मोबाइल से दूरी बनाकर पढ़ाई पर विशेष ध्यान कैसे दिलाया जाए? पटना यूनिवर्सिटी की फैकल्टी लेक्चरर और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट ईशा सिंह ने एबीपी न्यूज से खास बातचीत में इन दिक्कतों से निपटने के तरीके बताए.
पैरेंट्स को ध्यान देनी चाहिए ये बातें
ईशा सिंह के मुताबिक, बोर्ड एग्जाम हो तो इसके लिए एक महीने में तैयारी नहीं हो सकती. बच्चे को यह पता होता है कि उन्हें बोर्ड का एग्जाम देना है. ऐसे में वे उसकी तैयारी पहले से करते हैं और जिन चीजों में उनका दिमाग नहीं लग रहा है, उस पर प्रेशर देने से कुछ नहीं होगा. पैरेंट्स को भी इस पर ध्यान देना जरूरी है. उन्हें देखना चाहिए कि बच्चा किस चीज में क्या कर रहा है, उस पर फोकस करना जरूरी है. बच्चों पर नंबर का प्रेशर न दें तो निश्चित तौर पर बच्चों का दिमागी संतुलन ठीक रहेगा.
छोटे बच्चों का कैसे रखें ध्यान?
जहां तक छोटे बच्चों के एग्जाम की बात है तो साइंस कहता है कि 7 साल के बाद कोई भी बच्चा पढ़ाई को समझने लगता है. ऐसे में पैरेंट्स को फर्स्ट, सेकंड, थर्ड क्लास के बच्चों पर प्रेशर नहीं देना चाहिए. बच्चा जो पढ़ाई कर रहा है, उस पर तो ध्यान दें, लेकिन टॉर्चर न करें. उसके साथ खुद गेम खेलें, लेकिन मोबाइल में नहीं. उसे हार-जीत का अनुभव बताएंगे तो उसके दिमाग में यह बात आएगी कि क्या करना है. बच्चे को हिस्ट्री से रूबरू कराने के लिए उसे बाहर घुमाने ले जाएं.
मोबाइल से बच्चों को कैसे रखें दूर?
मोबाइल से दूर रखने को लेकर ईशा सिंह ने बताया कि कोई भी चीज जब हम बार-बार करते हैं और उसे अचानक दूर किया जाता है तो निश्चित तौर पर दिमाग पर असर पड़ता है. उन्होंने सलाह दी कि आजकल बच्चे को खुश करने के लिए पैरेंट्स मोबाइल दे देते हैं. उसे पहले ही दूर रखना चाहिए था, लेकिन अब एग्जाम के वक्त अचानक दूर करने से समस्या हो सकती है. अभी साइंस भी कह रहा है कि कोविड के बाद मोबाइल का असर यह हुआ है कि बच्चा जिस तरीके से दिमागी तौर पर बड़ा होना चाहिए, उस तरह नहीं हो रहा है. ब्रेन में कमी, बिहेवियर में कमी, स्पीच में कमी, यह सब देखने को मिल रहा है. ऐसे में बच्चों को शुरुआत से ही दूर रखना चाहिए.
अचानक मोबाइल छीन लेंगे तो क्या होगा?
ईशा ने बताया कि अगर आप अचानक मोबाइल ले लेते हैं तो निश्चित है कि वह टेंशन में रहेगा. ऐसे में उसे फोन की जगह कुछ दूसरी चीज खेलने के लिए दें, जिससे उसका दिमागी संतुलन बना रहे. आप यह देख सकते हैं कि अगर बच्चे को मोबाइल से दूर किया गया है तो वह टेंशन में आ सकता है. इससे ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ज्यादा दिन तक इसका असर नहीं रहता है. अगर आप बच्चे को मोबाइल से लगातार दूर रखते हैं तो तीन से चार दिन में वह ठीक हो जाएगा. इसके बाद आप जो चीज उसे देंगे, उसके सामने वह फोन को भूल जाएगा और पढ़ाई भी ठीक से करने लगेगा. अगर आपको लगता है कि बच्चा नाराज हो गया है और यह सोचकर उसे बार-बार मोबाइल देते रहे तो आगे चलकर घातक हो सकता है.
सोशल मीडिया के दौर में क्या करें?
ईशा सिंह के मुताबिक, सोशल मीडिया इस समय में रियलिटी है, हम उसको अपनी लाइफ से नहीं हटा सकते. एग्जाम के टाइम में भी उसे ज्यादा दूर नहीं कर सकते. आप पैरेंट्स हैं तो उसे लिमिट कर सकते हैं. फेसबुक, इंस्टाग्राम पर आपके बच्चे के लिए मैसेज का लेन-देन होता है. मोबाइल के जरिए पढ़ाई भी होने लगी है तो आपको यह देखना होगा कि बच्चा मोबाइल से कितनी पढ़ाई कर रहा है और कितना समय अन्य चीजों में दे रहा है. अगर बच्चा रात भर मोबाइल लेकर कुछ अन्य चीजें देख रहा है तो उस पर लगाम लगाने की जरूरत है.
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