कभी पेट पालना था मुश्किल, घाट-घाट पर गाना गाकर किया गुजारा, अब करोड़ों के मालिक हैं मनोज तिवारी

aditisingh
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मनोज तिवारी आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है. भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री से लेकर राजनीति की दुनिया तक में उनका सिक्का चलता है. लेकिन यहां तक पहुंचना उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था. हाल ही में मनोज तिवारी ने अपने स्ट्रगल और गरीबी के दिनों के बारे में खुलकर बात की.

मनोज तिवारी वैसे तो बिहार के गांव अतरौलिया से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन उनका जन्म बनारस के कबीर चौरा में हुआ था. वो बहुत छोटे थे तभी उनके पिता का निधन हो गया और घर का सारा भार उनके कंधों पर आ गया. बता दें मनोज तिवारी छह भाई-बहन थे.

विरासत में मिली संगीत

उनकी मां को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार पेट भरना भी मुश्किल होता था. साइकिल खरीदने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं थे, ऐसे में वो कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते थे. आपको पता दें मनोज तिवारी के पिता शास्त्रीय संगीत के गायक थे और उन्हें अपने पिता से ही सिंगिंग विरासत में मिली.

बनारस में पैदा हुए मनोज तिवारी ने वहीं से पढ़ाई की थी. उसके बाद बनारस के घाटों पर गाना गाने लगे. दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में मनोज तिवारी ने कहा कि वो माता रानी के जगराता में गाते, मंदिरों में गाते थे. यहीं से उन्हें भोजपुरी फिल्मों में गाने का मौका मिला.

आपको बता दें मनोज तिवारी का पहला म्यूजिक एल्बम था ‘बगलवाली’. इससे उन्हें काफी पॉपुलैरिटी मिली थी. द ग्रेट इंडियन कपिल शो में भी मनोज तिवारी ने स्ट्रगल के दिनों के बारे में बात करते हुए कहा कि उन्होंने ड्राइवर का भी काम किया है. तीन साल तक उन्होंने ड्राइविंग की करके अपनी पढ़ाई की थी.

इसी वजह से वो किसी भी काम को छोटा नहीं समझते हैं. अब तो मनोज तिवारी लग्जरी लाइफ जीते हैं. चुनावी हलफनामों के अनुसार मनोज तिवारी की नेट वर्थ करीब 33 करोड़ रुपये है. वो एक फिल्म के लिए करीब 55 लाख रुपये तक चार्ज करते हैं.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.
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