दक्षिण भारतीय मंदिरों के आसपास नॉन-वेज खाने पर बैन क्यों नहीं है? वजह जानकर चौंक जाएंगे!

सतीश कुमार
6 Min Read

उत्तर भारत में मंदिरों के आस-पास खान-पान से जुड़े नियमों में सख्ती बरती जाती है, लेकिन दक्षिण भारत में लोग इस मामले में अधिक खुल और व्यवहारिक होते हैं, इसलिए मंदिरों के आसपास अलग-अलग प्रकार के व्यंजन यहां तक की नॉन-वेज भी मिल जाता है.

दक्षिण भारत में धार्मिक आस्था के प्रति भावना काफी गहरी है लेकिन, खान-पान से जुड़े मामलों में व्यक्तिगत और आर्थिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जाती है. वहीं, उत्तर भारत में चीजें विपरीत हैं, जहां शाकाहार भोजन धार्मिक अनुष्ठानों से काफी जुड़ा हुआ है.

दक्षिण भारत में मांसाहार धार्मिक अशुद्धता के रूप में नहीं

दक्षिण भारतीय परंपराओं में मंदिर परिसर के अंदर अनुष्ठानिक शुद्धता को मंदिर परिसर के बाहर खाने-पीने की आदतों से अलग रखा जाता है.

केरल और बंगाल में नायर, रेड्डी, बोक्कालिगा, थेवर और यहां तक कि कुछ ब्राह्मण समुदायों में काफी समय से मांस और मछली का सेवन होता रहा है. यहां मांसाहार धार्मिक अशुद्धता के रूप में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है.

दक्षिण और उत्तर भारत मंदिरों में खास अंतर

एक और खास अंतर मंदिरों के प्रशासन से भी जुड़ी है. उत्तर भारत में अधिकतर मंदिरों का संचालन राजनीतिक या सामाजिक रूप से प्रेरित संगठनों द्वारा किया जाता है, जो आमतौर पर सख्त शाकाहार भोजन को बढ़ावा देते हैं.

वहीं, दक्षिण भारत के मंदिरों का संचालन आमतौर पर देवस्थानम बोर्डों या मठों द्वारा किया जाता है, जो स्थानीय समुदायों के प्रतिनिधित्व को दर्शाते हैं, जिससे कठोर भोजन से जुड़े नियमों का पालन करना असामान्य हो जाता है.

इसका एक कारण दक्षिण भारत में द्रविड़ आंदोलन, अंबेडकरबादी विचारधारा और स्थानीय राजनीति की वजह से मंदिरों के आसपास धार्मिक मामलों में अधिक सख्ती देखने को नहीं मिलती है. इसलिए लोगों पर खाने-पीने के मामलें में कोई खास पाबंदी नहीं है.

तमिलनाडु के रामेश्वरम और आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम जैसे मंदिर नगरों में हैं, जहां स्थानीय समुदार खासकर मछुआरे अपनी आजीविका के लिए मांसाहारी भोजन की बिक्री पर निर्भर हैं. इन इलाकों में ऐसी दुकानों को हटाने की उम्मीद करना न केवल सही है, बल्कि नैतिक रूप से भी गलत है.

समुद्र के पास तटीय क्षेत्रों के पास अधिक मात्रा में मछली और मांस उपलब्ध होने और प्राचीन द्रविड़ पाक परंपराओं के कारण भी इन क्षेत्रों में मछली और मांस का सेवन सामान्य बात है.

दक्षिण भारत के ग्रामीण और स्थानीय परंपराएं क्या कहती हैं?

इसके अलावा दक्षिण भारत के कई ग्रामीण और स्थानीय परंपराओं में जिनमें कुछ शैव और शाक्त अनुष्ठान भी शामिल है, मांस-मछली का अर्पण किया जाता है. इसलिए मंदिरों के नजदीक मांस की दुकानों का विरोध देखने या सुनने को नहीं मिलता है.

दक्षिण भारत में धर्म के मामले में दूसरों को नियंत्रित करने की बजाय भक्ति और अंदरूनी आध्यात्मिकता पर जोर दिया जाता है. इस कारण वहां अधिक सहिष्णु माहौल देखने को मिलता है और खाने-पीने के आदतें भी लोग आसानी से मान लेते हैं.

ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो चोल और पांड्य जैसे दक्षिण भारत के शासक जो अपने मंदिर संरक्षण के लिए जाने जाते थे, असल में मांसहार का सेवन करते थे, जिससे धार्मिक आस्था के साथ-साथ मांसाहारी आहार स्थानीय संस्कृति का अहम हिस्सा बन गया है.

इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गुजरात, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में शाकाहारी लोगों की संख्या ज्यादा है. इसके उलट आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और तेलंगाना में आधिकांश लोग मांसहार का सेवन करते है.

दक्षिण भारत के ऐसे मंदिर जो पवित्र होने के बाद भी इनके आस-पास मांसाहारी भोजन परोसने वाले होटल और रेस्तरां शामिल है-

  • रामेश्वरम, रामनाथपुरम तमिलनाडु का एक ज्योतिर्लिंग मंदिर जो स्थानीय मछुआरे समुदाय को समर्थन करने वाले समुद्री भोज रेस्तरां से घिरा हुआ है.
  • मीनाक्षी मंदिर मदुरै तमिलनाडु शहर के व्यस्त हिस्से में बना है, जिसके आसपास मटन बिरयानी की दुकानें भी है.
  • चिदंबरम नटराज मंदिर तमिलनाडु जो शाकाहारी और मांसाहारी भोजनालयों से घिरा हुआ है.
  • अरुणातलेश्वर मंदिर तिरुवन्नामलाई तमिलनाडु स्थानीय होटल में नॉन-वेज भी मिलता है.
  • श्रीशैलम, कुरनूल आंध्र प्रदेश मंदिर के बाहरी परिसर में मांसाहारी भोजन बेचे जाते हैं, जबकि मंदिर का आंतरिक हिस्सा पूरी तरह से शाकाहारी है.

एक अपवाद है तिरुपति बालाजी मंदिर, आंध्र प्रदेश में मंदिर के पास मांसाहार का सेवन करने पर पूरी तरह से प्रतिबंद लगा हुआ है, लेकिन निचले शहर में नॉनवेज आसानी से मिल जाता है.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.
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