ये तरीके आजमा लिए तो नहीं आएगी दीवारों पर सीलन, काम के हैं ये टिप्स

सतीश कुमार
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कई बार घरों की दीवारों पर सीलन बहुत बड़ी परेशानी बन जाती है. बरसात और नमी वाले इलाकों में यह समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है. सीलन सिर्फ दीवार की खूबसूरती ही खराब नहीं करती बल्कि पेंट उखड़ने, बदबू, एलर्जी और कई बार कीड़े मकोड़े की वजह भी बनती है. इतना ही नहीं लंबे समय तक नजरअंदाज करने पर यह घर की मजबूती को भी नुकसान पहुंचा सकती है. ऐसे में जरूरी है कि समय रहते सही कदम उठाया जाए और सीलन को जल्दी से जल्दी खत्म किया जाए. चलिए तो अब हम आपको बताते हैं कि कौन से तरीके अपनाने से घरों में सीलन नहीं आएगी.

क्यों होती है दीवारों में सीलन?

घरों में सीलन आने के पीछे कई वजह हो सकती है. कई बार कंस्ट्रक्शन के दौरान हुई गलती बाद में परेशानी बन जाती है. वहीं दीवारों की ईंटों का कमजोर होना, प्लास्टर का ठीक से सेट ना होना और उससे बनी दरार, छत या फर्स पर पानी का जमा होना, ड्रेनेज पाइप का ब्लॉक होना, दीवारों के अंदर पाइप लाइन से रिसाव यह सभी सीलन के बड़े कारण माने जाते है. इसके अलावा घर में हवा का नहीं आना नमी जमा होने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है. खासकर बाथरूम, किचन और स्टोर रूम में अगर हवा नहीं निकल पाती, तो वहां सीलन जल्दी बनती है. ऐसे में खिड़कियां खोलकर रखना और जरूरत पड़ने पर एग्जॉस्ट फैन लगवाना मददगार साबित हो सकता है.

वॉटरप्रूफिंग और वाटरप्रूफ पेंट का असर

सीलन से बचाव के लिए वॉटरप्रूफिंग को सबसे असरदार और टिकाऊ उपाय माना जाता है. खासतौर पर बाहरी दीवारों, बाथरूम और किचन से सटी दीवारों पर वाटरप्रूफ कोटिंग जरूरी होती है. छत पर वॉटरप्रूफिंग न होने से ऊपर से रिसता पानी दीवारों में सीलन पैदा कर सकता है. इसके अलावा पेंट करवाते समय एंटी फंगल प्राइमर और वॉटरप्रूफ पेंट का इस्तेमाल नमी को दीवारों से समाने से रोकता है.

पाइपलाइन लीकेज को न करें नजरअंदाज

दीवारों के अंदर छुपा हुआ पाइप लीकेज सीलन का एक आम लेकिन अनदेखा कारण है. बाथरूम या किचन के आसपास अगर दीवार लगातार नम रहती है या बदबू आती है, तो यह लीकेज का संकेत हो सकता है. समय पर प्लंबर से जांच कराकर लीकेज ठीक करना जरूरी है, क्योंकि लगातार नमी दीवार को अंदर से कमजोर कर देती है.

दरारें और छेद तुरंत भरवाएं

पुराने घरों में दीवारों में छोटे-छोटे दरारें होना आम बात है, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करने पर यही दरारें पानी और नमी का रास्ता बन जाते हैं. सीमेंट, सीलेंट या पुट्टी से दरारें और छेद भरवाने से सीलन का खतरा कम किया जा सकता है. खासकर दरवाजों, खिड़कियों के फ्रेम और पाइपलाइन के आसपास की दीवारों पर ध्यान देना जरूरी है.

सही ड्रेनेज सिस्टम है जरूरी

घर की छत से पानी के निकासी के लिए ड्रेनेज सिस्टम का सही होना बहुत जरूरी है. पाइप जाम न हो और ढलान ऐसी हो कि पानी आसानी से बह जाए. घर के बाहर की नालियों को साफ रखना भी जरूरी है, ताकि पानी इकठ्ठा न हो और दीवारें तक नहीं पहुंचे.

दीवारों को समय-समय पर सुखाना भी जरूरी

बरसात के मौसम में नमी वाले कमरों में दीवारों को पूरी तरह सुखाना भी जरूरी उपाय है. हफ्ते में कुछ बार पंखा या हीटर चलाकर दीवारों की नमी कम की जा सकती है, जिससे सीलन बढ़ने से पहले ही खत्म हो जाए.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.