आज के समय में सोने और चांदी के दाम बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद ज्वेलरी की मांग कम नहीं हुई है. फर्क सिर्फ इतना आया है कि अब लोग भारी गहनों की जगह हल्की, स्टाइलिश और यूनिक डिजाइन वाली ज्वेलरी पसंद कर रहे हैं. इसी बदलते ट्रेंड ने ज्वेलरी डिजाइनिंग को एक मजबूत करियर ऑप्शन बना दिया है. अगर आप भी क्रिएटिव हैं और सोने-चांदी की दुनिया में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, तो 12वीं के बाद ज्वेलरी डिजाइनिंग कोर्स आपके लिए सही रास्ता हो सकता है.
जब सोने-चांदी के रेट बढ़ते हैं, तो ग्राहकों की सोच भी बदल जाती है. लोग चाहते हैं कि कम मेटल में भी ज्वेलरी खूबसूरत दिखे और अलग पहचान बनाए. यही वजह है कि आज के समय में डिजाइन की अहमियत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है.ज्वेलरी शॉप्स और बड़े ब्रांड्स ऐसे डिजाइनर्स की तलाश में रहते हैं, जो कम सोने में बेहतर और ट्रेंडी डिजाइन तैयार कर सकें.
ज्वेलरी डिजाइनिंग कोर्स क्या है?
ज्वेलरी डिजाइनिंग कोर्स में छात्रों को गहनों की डिजाइनिंग से जुड़ी पूरी जानकारी दी जाती है. इसमें यह सिखाया जाता है कि किसी ज्वेलरी का आइडिया कैसे सोचा जाए, उसका स्केच कैसे बनाया जाए और फिर उसे असली गहने में कैसे बदला जाए. कोर्स के दौरान सोना, चांदी, हीरे और रत्नों की बेसिक समझ, डिजाइन की फिनिशिंग और बाजार के ट्रेंड पर भी फोकस किया जाता है.
कोर्स के लिए योग्यता
- ज्वेलरी डिजाइनिंग कोर्स करने के लिए आमतौर पर उम्मीदवार का 12वीं पास होना जरूरी होता है.
- अच्छी बात यह है कि यह कोर्स किसी भी स्ट्रीम के छात्र कर सकते हैं.
- कुछ शॉर्ट सर्टिफिकेट कोर्स ऐसे भी हैं, जिनमें 10वीं पास छात्र भी दाखिला ले सकते हैं.
- इस कोर्स के लिए सबसे जरूरी योग्यता डिजाइनिंग में रुचि और सीखने की लगन मानी जाती है.
कौन-सी स्किल्स जरूरी हैं?
- इस फील्ड में आगे बढ़ने के लिए क्रिएटिव सोच होना बहुत जरूरी है.
- ड्रॉइंग और स्केचिंग की बेसिक समझ, रंगों और पैटर्न की पहचान, और बारीक काम करने की आदत डिजाइनर को आगे ले जाती है.
- इसके साथ-साथ आज के समय में कंप्यूटर और CAD डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर सीखना भी बेहद जरूरी हो गया है.
- बढ़ते गोल्ड रेट के दौर में वही डिजाइनर ज्यादा सफल होते हैं, जो स्मार्ट और किफायती डिजाइन बना सकें.
ज्वेलरी डिजाइनिंग में अलग-अलग तरह के कोर्स उपलब्ध हैं
- सर्टिफिकेट कोर्स कम समय के होते हैं और डिजाइनिंग की बेसिक जानकारी देते हैं.
- डिप्लोमा कोर्स 1 से 2 साल के होते हैं, जिनमें डिजाइनिंग के साथ जेमोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग भी सिखाई जाती है.
- डिग्री कोर्स जैसे B.Des या B.Voc 3 से 4 साल के होते हैं, जिनमें एडवांस डिजाइनिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की ट्रेनिंग दी जाती है.
आज ज्वेलरी डिजाइनिंग पूरी तरह मॉडर्न टेक्नोलॉजी से जुड़ चुकी है.CAD और 3D डिजाइनिंग की मदद से पहले ही यह पता चल जाता है कि किसी गहने में कितना सोना या चांदी लगेगी.इससे लागत कंट्रोल रहती है और डिजाइन ज्यादा परफेक्ट बनता है.ज्वेलरी डिजाइनिंग कोर्स करने के बाद करियर के कई रास्ते खुल जाते हैं.आप ज्वेलरी डिजाइनर, CAD डिजाइनर, जेमोलॉजिस्ट या डिजाइन कंसल्टेंट के रूप में काम कर सकते हैं.अनुभव बढ़ने के बाद अपना खुद का ज्वेलरी ब्रांड या डिजाइन स्टूडियो शुरू करना भी संभव है.बढ़ते गोल्ड रेट के कारण अच्छे डिजाइनर्स की मांग आने वाले समय में और बढ़ने

