स्ट्रेस से खुल रही इश्क की नई राह, हैरान कर देगा रिश्तों का यह नया ‘एंगल’

सतीश कुमार
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आज की जिंदगी तेज, थकान वाली और अक्सर उलझन से भरी हुई है. काम का दबाव, पैसों की चिंता, सोशल मीडिया की तुलना और हर समय कुछ साबित करने का तनाव, इन सबके बीच इंसान बस किसी तरह खुद को संभाले रखने की कोशिश कर रहा है. ऐसे माहौल में अगर कोई कहे कि तनाव सिर्फ आपकी सेहत नहीं, आपके प्यार करने के तरीके को भी बदल रहा है, तो शायद यह अजीब न लगे. दरअसल, आज के दौर में प्यार वैसा नहीं रह गया है जैसा फिल्मों या कहानियों में दिखता था. जहां एक इंसान, एक रिश्ता और जिंदगी भर का साथ होता था. अब रिश्ते भी बदल रहे हैं और इसकी एक बड़ी वजह लगातार बना रहने वाला स्ट्रेस है. 

तनाव में बदलता प्यार का मतलब

डेटिंग प्लेटफॉर्म एशले मैडिसन की एक हालिया रिपोर्ट कुछ चौंकाने वाली बातें सामने लाती है. रिपोर्ट के अनुसार, जब लोग ज्यादा तनाव में होते हैं, तो लगभग 49 प्रतिशत लोग एक से ज्यादा पार्टनर की ओर अट्रैक्ट होने लगते हैं. इस तरह के रिश्तों को अब एक नया नाम माइक्रो रोमांस दिया जा रहा है यानी ऐसा प्यार जो छोटा हो, हल्का हो, ज्यादा जिम्मेदारी न मांगे, लेकिन उस पल सुकून दे दे. इतना ही नहीं, 41 प्रतिशत लोगों का मानना है कि एक परफेक्ट साथी ढूंढने की जगह, अगर अलग-अलग लोगों से अलग-अलग तरह का भावनात्मक सहारा मिले, तो मुश्किल समय से निकलना आसान हो जाता है. 

आखिर तनाव ऐसा क्या कर देता है हमारे अंदर?

मनोचिकित्सकों और रिश्तों के जानकारों के अनुसार, जब इंसान लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो उसका शरीर और दिमाग लड़ो या भागो (Fight or Flight) की स्थिति में चला जाता है. इस हालत में इंसान गहराई नहीं चाहता, उसे बड़े वादे भारी लगने लगते हैं, लंबी बातचीत थका देती है और भावनात्मक जिम्मेदारियां बोझ जैसी महसूस होती हैं. मनोचिकित्सक कहते हैं कि जब आर्थिक, सामाजिक या निजी दबाव लगातार बने रहते हैं, तो इंसान का ध्यान रिश्ता निभाने से ज्यादा, किसी तरह दिन काटने पर चला जाता है. इससे धीरे-धीरे पेशंस कम हो जाता है, छोटी-छोटी बातों से चिढ़ होने लगती है और रिश्तों में दूरी आने लगती है.  

रिश्ता कैसे नहीं टिकता?

आज की डिजिटल दुनिया ने हमारी ध्यान देने की क्षमता को बहुत कम कर दिया है. हम लगातार नोटिफिकेशन, मैसेज और स्क्रॉलिंग में उलझे रहते हैं. काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट बताती हैं कि अब बातचीत भी पहले जैसी नहीं रही. अब हम जल्दी जवाब चाहते हैं, गहरी बातों से बचते हैं और भावनाओं को समझने के बजाय रिएक्ट करते हैं.ऐसे में प्यार भी छोटा, हल्का और कम जिम्मेदारी वाला होना सुरक्षित लगता है.

यही वजह है कि बड़े, गहरे प्रेम प्रसंगों की जगह छोटे-छोटे अंतरंग पल लोगों को ज्यादा कंर्फटेबल लगने लगे हैं. तनाव में रहने वाले कई लोग यह महसूस करते हैं कि अगर वे सिर्फ एक ही इंसान पर भावनात्मक रूप से निर्भर हो जाएं, तो वह रिश्ता बहुत भारी हो सकता है. जब कोई एक रिश्ता निराश करता है, तो दूसरा रिश्ता थोड़ी देर के लिए सुकून दे देता है. यह प्यार पाने से ज्यादा, अपने थके हुए दिमाग और शरीर को शांत करने की कोशिश होती है. कुछ लोग भरोसे की तलाश में या बस अकेलापन दूर करने के लिए एक से ज्यादा लोगों से जुड़ जाते हैं. 

तनाव भरे समय में रिश्ते कैसे संभालें?

परफेक्ट होने की कोशिश छोड़कर, सही इरादा रखना ज्यादा जरूरी है. इसलिए खुलकर बात करें, एक-दूसरे को गलत बताने से बचें, बस सुनें, तुरंत हल ढूंढने की जरूरत नहीं, साथ टहलना, चाय पीना जैसी छोटी आदतें अपनाएं  और जरूरत पड़े तो अकेले समय की सीमा भी तय करें. 

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.