अमेरिका में एच-1बी वीजा प्रोग्राम को लेकर चल रही बहस अब केवल नौकरी और सैलरी तक का सीमित नहीं रह गई है. हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस विवाद के साथ दक्षिण एशियाई समुदाय खासकर भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों और और ऑनलाइन भाषण में ट्रोलिंग की बढ़ोतरी देखी जा रही है. वहीं इस वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी भारतीय वर्ग का है, इसलिए इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अमेरिका में दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ एच-1 बी वीजा नस्लवाद विवाद बढ़ रहा है और इससे भारतीयों पर कितना असर पड़ रहा है.
स्थानीय विवाद और बढ़ती बयानबाजी
द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार टेक्सास के फ्रिस्को को शहर में हाल ही में हुई सिटी काउंसलिंग बैठक के दौरान कई स्पीकर्स ने आरोप लगाया कि एच-1बी वीजा प्रोग्राम की वजह से शहर पर भारतीयों का कब्जा हो गया है. वहीं पब्लिक प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वीजा धारकों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. हालांकि फ्रिस्को के मेयर जेफ चेनी ने ऐसे स्पीकर्स को बाहरी आंदोलनकारी करार दिया और कहा कि वह शहर के ज्यादातर निवासियों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं. इसके बावजूद दक्षिण एशियाई समुदाय के कई लोगों ने इस बहस के बढ़ते तीखे असर पर चिंता जताई है.
कैसे काम करता है एच-1बी वीजा प्रोग्राम?
1990 में शुरू किया गया एच-1बी वीजा हर साल 85,000 विदेशी लोगों को अमेरिका में काम करने की परमिशन देता है. रिपोर्ट के अनुसार 2013 में स्वीकृत लगभग चार लाख आवेदनों में से करीब तीन चौथाई भारतीय नागरिकों के थे, जिसका हवाला प्यू रिसर्च सेंटर के आंकड़ों में दिया गया. इस वीजा नियमों के तहत कंपनियां एच-1बी प्रोग्राम वाले लोगों को समान योग्यता वाले अमेरिकी कर्मचारियों से कम वेतन नहीं दे सकती है. लेकिन फिर भी इन प्रावधानों की प्रभावशीलता को लेकर बहस जारी है. इसे लेकर पिछले कुछ समय में छंटनी और वीजा धारकों से जुड़ी कुछ विवादित घटनाएं भी सामने आ चुकी है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिकी प्रशासन ने नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर का शुल्क अनिवार्य कर दिया है. साथ ही यह संकेत भी दिया है कि कानून का उल्लंघन करने पर छात्रों और प्रोफेशनल्स के वीजा और फ्यूचर पर असर पड़ सकता है.
ऑनलाइन ट्रोलिंग में भी बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार 2023 से 2025 के बीच दक्षिण एशियाई लोगों के खिलाफ ऑनलाइन ट्रोलिंग में अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल में 115 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. स्टॉप एएपीआई हेट संगठन ने पाया कि एशियाई समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन इस्तेमाल होने वाले अपमानजनक शब्दों में से करीब 80 प्रतिशत अब यह दक्षिण एशियाई लोगों को निशाना बनाते हैं. वहीं कुछ राजनीतिक हस्तियों ने भी इस तरह की भाषणों की सार्वजनिक रूप से निंदा की है और इसे चिंताजनक बताया है
भारतीय स्टूडेंट और प्रोफेशनल्स के लिए क्यों अहम माना जा रहा है ये मुद्दा
अमेरिका लंबे समय से भारतीय छात्रों और आईटी इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर वाले लोगों के लिए प्रमुख डेस्टिनेशन रहा है. वहीं एच-1बी वीजा को लेकर जारी बहस और इसके साथ बढ़ती नस्लीय बयानबाजी यह संकेत दे रही है कि यूएस में वीजा पॉलिसी पर बहस कैसे हो रही है और साथ ही साउथ एशियन कम्युनिटीज पर कड़ी नजर रखी जा रही है.
ये भी पढ़ें-भारत में पकड़े गए जासूस को मिलती है इतनी खतरनाक सजा, टॉर्चर जान कई दिन खाना नहीं खाएंगे आप
Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI

