नया कंप्यूटर या लैपटॉप लेते ही अधिकतर लोग एंटीवायरस इंस्टॉल करते हैं. कोई नहीं चाहता कि मालवेयर या वायरस के कारण उनके डेटा की चोरी हो. ज्यादातर मौकों पर एंटीवायरस काम भी करते हैं और ये डेटा चोरी और मालवेयर अटैक से बचा सकते हैं, लेकिन अब एंटीवायरस सुइट में VPN, पैरेंटल कंट्रोल और ब्राउजर एड-ऑन्स जैसी चीजें आने लगी हैं, जिससे ये कंप्यूटर के ज्यादातर रिसोर्सेस यूज कर लेते हैं और आपको ऐप्स और फाइल्स खोलने में ज्यादा समय लगने लगता है.
सिस्टम को स्लो कर देते हैं एंटीवायरस
एंटीवायरस सॉफ्टवेयर खुद को साइलेंट प्रोटेक्टर के तौर पर दिखाते हैं और बैकग्राउंड में काम करते हैं, लेकिन इसका असर पूरे सिस्टम पर दिखता है. जैसे ही आप सिस्टम पर कोई फाइल ओपन, डाउनलोड, कॉपी या मॉडिफाई करते हैं, एंटीवायरस उसे स्कैन करता है. इसी तरह शेड्यूल्ड स्कैनिंग भी होती है. इस कारण कई बार सिस्टम की स्पीड स्लो हो जाती है और आपको काम करने में अधिक टाइम लगने लगता है. रुटीन स्कैन में यह फिर भी परफॉर्मेंस को कम प्रभावित करता है, लेकिन फुल स्कैन में इससे कंप्यूटर की परफॉर्मेंस पर काफी असर पड़ता है. साधारण यूज के दौरान इसका ज्यादा पता नहीं चलता, लेकिन वीडियो एडिटिंग, गेमिंग और दूसरे हाई-एंड टास्क करते समय यह काफी परेशान करता है.
इससे बचाव का तरीका क्या है?
अगर एंटीवायरस के कारण आपका सिस्टम भी स्लो हो गया है तो इस अनइंस्टॉल करने के अलावा भी एक तरीका है. आप इसे अपनी जरूरतों के हिसाब से फाइन-ट्यून कर सके हैं, जिससे यह कम रिसोर्सेस में काम करेगा. इससे आपके कंप्यूटर की परफॉर्मेंस पर भी असर नहीं पड़ेगा और प्रोटेक्शन भी मिलती रहेगी. अगर आप इससे बिल्कुल ही परेशान हो गए हैं तो इसे अनइंस्टॉल भी कर सकते हैं. घबराने की जरूरत नहीं है. माइक्रोसॉफ्ट डिफेंडर से आपको बिना एंटीवायरस भी फुल प्रोटेक्शन मिलती रहती है.
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