RBI Slaps Fine On Banks: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने नियामकीय निर्देशों का पालन न करने के मामले में कई बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों पर मौद्रिक जुर्माना लगाया है. केंद्रीय बैंक ने Bank of Maharashtra पर 32.50 लाख रुपये, DCB Bank पर 29.60 लाख रुपये और CSB Bank पर 63.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया. इसके अलावा Navi Finserv पर 3.80 लाख रुपये और IIFL Finance पर 5.30 लाख रुपये का दंड लगाया गया है.
कई बैंकों के ऊपर जुर्माना
आरबीआई के अनुसार, बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्यों से संबंधित डेटा क्रेडिट सूचना कंपनियों को उपलब्ध नहीं कराया और कुछ खातों में वास्तविक लाभार्थी (Beneficial Owner) की पहचान सुनिश्चित नहीं की. सीएसबी बैंक पर इसलिए जुर्माना लगाया गया क्योंकि उसने बैंक प्रतिनिधि के साथ ऐसे कार्यों के लिए समझौता किया जो निर्धारित दायरे से बाहर थे, साथ ही कुछ बचत खातों पर शुल्क लगाने से पहले ग्राहकों को स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई.
डीसीबी बैंक के मामले में केंद्रीय बैंक ने पाया कि उसने कुछ गैर-कृषि गोल्ड लोन खातों में निर्धारित ‘लोन-टू-वैल्यू’ (LTV) अनुपात को ऋण अवधि के दौरान बनाए नहीं रखा. वहीं, आईआईएफएल फाइनेंस पुनर्गठन के दौरान कुछ खातों को ‘गैर-निष्पादित परिसंपत्ति’ (NPA) के रूप में सही ढंग से वर्गीकृत करने में विफल रहा.
नवी फिनसर्व ने बकाया ऋण की वसूली के दौरान ग्राहकों से अनुचित समय पर संपर्क किया और संदेश भेजने में निर्धारित आचार नियमों का पालन नहीं किया. इन सभी मामलों में नियामकीय मानकों के उल्लंघन के कारण आरबीआई ने मौद्रिक दंड लगाया है.
अग्रणी बैंक योजना संशोधन प्रस्ताव
Reserve Bank of India (आरबीआई) ने ‘अग्रणी बैंक योजना’ (Lead Bank Scheme–LBS) के परिचालन ढांचे को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए संशोधित दिशानिर्देशों का प्रस्ताव जारी किया है. यह योजना वर्ष 1969 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य जिला स्तर पर विकास गतिविधियों का बेहतर समन्वय करना और बैंकिंग सेवाओं को योजनाबद्ध तरीके से विस्तार देना था.
एलबीएस के तहत प्रत्येक जिले में एक अग्रणी बैंक को नामित किया जाता है, जो वहां वित्तीय समावेशन, प्राथमिकता क्षेत्र में ऋण वितरण और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करता है. इस योजना का मुख्य लक्ष्य बैंकों, राज्य सरकारों और अन्य विकास एजेंसियों के बीच तालमेल स्थापित कर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे कृषि, एमएसएमई, स्वरोजगार और कमजोर वर्ग में ऋण प्रवाह बढ़ाना है. साथ ही, वित्तीय समावेशन को मजबूत कर बैंकिंग सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी इसका अहम उद्देश्य है.
आरबीआई द्वारा प्रस्तावित नए दिशानिर्देशों में योजना के उद्देश्यों को और स्पष्ट एवं परिष्कृत करने पर जोर दिया गया है. इसके अलावा विभिन्न मंचों की संरचना, सदस्यता और कार्यसूची को व्यवस्थित करने, प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने तथा State Level Bankers’ Committee (एसएलबीसी) और अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) कार्यालयों को सशक्त बनाने जैसे प्रावधान शामिल हैं. इन बदलावों का मकसद एलबीएस को अधिक जवाबदेह, परिणामोन्मुख और वर्तमान बैंकिंग जरूरतों के अनुरूप बनाना है, ताकि जमीनी स्तर पर विकास कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके.

