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आसमान में दुश्मन की अब खैर नहीं! AkashTeer के लिए आर्मी खरीदेगी 30 सुपर-एडवांस्ड रडार, जानिए किस टेक्नोलॉजी पर करेगी काम

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On February 7, 2026
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AkashTeer: भारतीय सेना अपनी एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. रक्षा मंत्रालय ने सेना के लिए 30 उन्नत लो-लेवल लाइटवेट रडार (LLLR-I) और दो क्लासरूम वेरिएंट रडार (CVR) खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए करीब 725 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. यह खरीद आपातकालीन प्रक्रिया के तहत की जाएगी ताकि सिस्टम जल्द से जल्द तैनात हो सके.

हर तरह के इलाके में काम करने की क्षमता

इन नए रडार सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे पहाड़ी क्षेत्रों, ऊंचाई वाले इलाकों, मैदानी क्षेत्रों, अर्ध-रेगिस्तान, रेगिस्तान और तटीय क्षेत्रों जैसे अलग-अलग भौगोलिक हालात में प्रभावी ढंग से काम कर सकें. इससे सेना को देश की सीमाओं और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी में बड़ी मदद मिलेगी.

AkashTeer सिस्टम से सीधा इंटीग्रेशन

अपग्रेडेड LLLR-I रडार को AkashTeer कमांड एंड रिपोर्टिंग सिस्टम के साथ पूरी तरह संगत होना जरूरी होगा. इसमें इसका गेटवे हार्डवेयर, इन-बिल्ट सॉफ्टवेयर और आर्मी डेटा नेटवर्क से जुड़े साइबर मानकों का पालन शामिल है. यह रडार एयर सर्विलांस टूल के रूप में काम करेगा जो आसमान में मौजूद खतरों को पहचानने, ट्रैक करने और उनकी प्राथमिकता तय करने में सक्षम होगा. एक साथ सैकड़ों हवाई लक्ष्यों को संभालने की क्षमता भी इसमें शामिल होगी.

कई कमांड पोस्ट को एक साथ जानकारी

RFP के मुताबिक, यह रडार कम से कम 20 लक्ष्यों की जानकारी एक समय में 10 कमांड पोस्ट या 10 हथियार प्रणालियों तक भेज सकेगा. ये सिस्टम 20 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद टारगेट डेटा रिसीवर से लाइन, रेडियो या रेडियो रिले लिंक के जरिए जुड़ सकेंगे. जरूरत पड़ने पर इसे 20 TDR तक बढ़ाया जा सकेगा. इसके साथ ही, इसमें कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का होना अनिवार्य रखा गया है.

समयसीमा और लंबी उम्र की शर्त

डिलीवरी को लेकर सख्त समयसीमा तय की गई है. एडवांस भुगतान के 12 महीनों के भीतर पहले 15 LLLR-I यूनिट और एक CVR देना होगा जबकि बाकी सिस्टम अगले छह महीनों में सौंपे जाएंगे. इन उपकरणों की न्यूनतम सेवा अवधि 10 साल तय की गई है ताकि लंबे समय तक इनकी विश्वसनीयता बनी रहे.

ट्रेनिंग और रखरखाव पर भी जोर

निर्माताओं को ऑपरेटर, ट्रेनर और मेंटेनेंस स्टाफ के लिए पूरी ट्रेनिंग देनी होगी. साथ ही, पहले सिस्टम की वारंटी खत्म होने से 3 से 6 महीने पहले रखरखाव से जुड़ी ट्रेनिंग भी अनिवार्य होगी. LLLR-I सिस्टम में सर्च रडार, कमांडर डिस्प्ले यूनिट, टारगेट डेजिग्नेशन सिस्टम और पावर सप्लाई यूनिट शामिल होंगी जिन्हें जरूरत के हिसाब से तैनात कर संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा की जाएगी.

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Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।