इस देश में बढ़ेगी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की फीस, जानें किस देश के स्टूडेंट्स को सबसे ज्यादा होगा नुकसान?

सतीश कुमार
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शिक्षा क्षेत्र में हाल के दिनों में कई बदलाव आए हैं, जिनका सीधा असर छात्रों पर पड़ा है. खासतौर पर प्राइवेट यूनिवर्सिटी और कॉलेजों की फीस में बढ़ोतरी की खबरें आ रही हैं, जिससे छात्रों में चिंता का माहौल है. एक प्रमुख बदलाव ओंटारियो, कनाडा में हुआ है, जहां सार्वजनिक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए ट्यूशन फीस में बढ़ोतरी की योजना बनाई गई है. इस फैसले का उद्देश्य उच्च शिक्षा क्षेत्र को स्थिर करना और उसे वित्तीय संकट से उबारना है. अब सवाल ये उठता है कि इस बढ़ी हुई फीस का असर किन छात्रों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा. 

ओंटारियो में शिक्षा क्षेत्र पर होने वाले बदलाव

ओंटारियो, कनाडा के लिए यह बड़ा बदलाव है. 2019 के बाद पहली बार कॉलेज और विश्वविद्यालयों को ट्यूशन फीस बढ़ाने की अनुमति मिल रही है. 2019 में, फीस में 10 प्रतिशत की कटौती की गई थी ताकि उच्च शिक्षा को अधिक सस्ता और सुलभ बनाया जा सके, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा संस्थानों का कहना है कि उस समय से लेकर अब तक इस फैसले से बजट पर बहुत दबाव पड़ा है.

विशेष रूप से, अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीजा में कटौती के कारण भी वित्तीय संकट बढ़ा है और कई कार्यक्रमों और सेवाओं में कटौती करनी पड़ी है. अब ओंटारियो सरकार ने नया वित्तीय ढांचा अपनाया है, जिसमें कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को अगले तीन सालों तक हर साल 2 प्रतिशत तक ट्यूशन फीस बढ़ाने की इजाजत दी जाएगी. इसके बाद, यह वृद्धि मुद्रास्फीति दर पर निर्भर करेगी और तीन साल की औसत मुद्रास्फीति दर से ज्यादा नहीं बढ़ेगी. 

क्या बदल रहा है?

यह परिवर्तन कई स्तरों पर छात्रों पर असर डालेगा. सबसे पहले, ओंटारियो के कॉलेज और विश्वविद्यालयों को अगले चार वर्षों में 6.4 बिलियन कनाडाई डॉलर का अतिरिक्त निवेश मिलेगा, जिससे उनकी वित्तीय स्थिरता में सुधार हो सके, लेकिन दूसरी तरफ, ट्यूशन फीस बढ़ने से छात्रों के लिए शिक्षा की लागत बढ़ जाएगी. कॉलेज के छात्रों के लिए फीस में रोजाना लगभग 18 सेंट और विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए 47 सेंट की बढ़ोतरी होगी. इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो पहले ही जीवन यापन के उच्च खर्चों का सामना कर रहे हैं. 

छात्र सहायता में बदलाव

इसके अलावा, ओंटारियो सरकार ने छात्र सहायता कार्यक्रम की संरचना में भी बदलाव किया है. अब, छात्रों को अपनी कुल सहायता राशि का 25 प्रतिशत अनुदान के रूप में मिलेगा, और बाकी का 75 प्रतिशत ऋण के रूप में मिलेगा. यह परिवर्तन उन छात्रों के लिए कठिनाई पैदा कर सकता है, जो पहले अनुदान पर निर्भर रहते थे. आलोचक इस बदलाव को लेकर चिंतित हैं कि इससे छात्रों का कर्ज बढ़ेगा, जो पहले ही भारी जीवन यापन खर्चों का सामना कर रहे हैं. विपक्षी सांसदों का कहना है कि फीस में वृद्धि और अनुदान में कटौती के कारण छात्रों पर आर्थिक दबाव और बढ़ जाएगा. 
 
संस्थागत स्थिरता और वहनीयता के बीच संतुलन

इस नई नीति को समर्थन देने वाले लोग मानते हैं कि यह ओंटारियो के कॉलेज और विश्वविद्यालयों के लिए एक जरूरी कदम है, ताकि वे वित्तीय संकट से उबर सकें. खासकर अंतरराष्ट्रीय नामांकनों में गिरावट के कारण संस्थानों को पिछले कुछ सालों में भारी घाटा हुआ है. हालांकि, विशेषज्ञ यह चेतावनी भी दे रहे हैं कि फीस में मामूली वृद्धि भी उन छात्रों के लिए बहुत भारी पड़ सकती है, जो पहले से ही महंगे किराए और खाद्य पदार्थों के बढ़ते खर्चों से जूझ रहे हैं. 

छात्रों के लिए इसका क्या मतलब है?

इस नीति के परिणाम मिश्रित हो सकते हैं. संस्थानों के लिए यह नीति वित्तीय स्थिरता की दिशा में एक कदम हो सकती है, लेकिन छात्रों के लिए यह एक चुनौती बन सकती है. बढ़ी हुई फीस और अधिक ऋण पर निर्भरता छात्रों पर भारी पड़ सकती है. यह बदलाव कई छात्रों के लिए और भी अधिक वित्तीय दबाव पैदा कर सकता है, खासकर उन छात्रों के लिए जिनके पास पहले से ही सीमित संसाधन हैं. 

अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर क्या असर होगा?

कनाडा में विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या काफी ज्यादा है ऐसे में, इस नए ढांचे के तहत, अंतरराष्ट्रीय छात्रों को ज्यादा नुकसान हो सकता है, क्योंकि उनकी ट्यूशन फीस पहले ही अधिक होती है. इसलिए, इस बढ़ोतरी से उन्हें अपनी शिक्षा पूरी करने में और भी अधिक वित्तीय चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. 

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.