FIIs Investment in February: ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है. कच्चे तेल की कीमत, सोने-चांदी के भाव, शेयर बाजार से लेकर निवेशकों की चाल पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
वहीं, भारतीय घरेलू बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी पर भी सवाल उठने लगे है. हालांकि, फरवरी महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार पर भरोसा जताया है. आंकड़ों की बात करें तो, इस दौरान विदेशी निवेशकों ने करीब 22,615 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं. आइए जानते हैं, इस विषय में…
विदेशी निवेशक फरवरी में बने खरीदार
आंकड़ों के अनुसार फरवरी महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सेकेंडरी मार्केट में करीब 19,782 करोड़ रुपए का निवेश किया है. वहीं, प्राइमरी मार्केट में लगभग 2,832 करोड़ रुपये डाले हैं. हालांकि, बीते शुक्रवार को एक ही दिन में विदेशी निवेशकों ने 7,536.36 करोड़ रुपये बाजार से निकाल लिए थे. फिर भी उनकी दिलचस्पी भारतीय घरेलू बाजार पर बनी हुई है.
विदेशी निवेशक पहले से ज्यादा सतर्क होकर खरीदारी कर रहे हैं और कुछ चुनिंदा सेक्टरों पर अपना दांव लगा रहे हैं. उदाहरण के लिए पिछले दिनों आईटी सेक्टर में आई कमजोरी और एंथ्रोपिक शॉक की वजह से फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स ने आईटी शेयरों की बिकवाली की.
वहीं, फाइनेंशियल सर्विसेज और कैपिटल गुड्स सेक्टर में वे खरीदार बने. जिससे पता चलता है कि विदेशी निवेशक चुनिंदा सेक्टरों पर अपना दांव लगाना पसंद कर रहे हैं.
विदेशी निवेशकों का कैसा रहेगा रुख?
ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की भावना को कमजोर कर सकते हैं. ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक जल्द फैसले लेने के बजाय स्थिति को समझने की कोशिश कर सकते हैं. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी.के. विजयकुमार का कहना है कि मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष फिलहाल बाजारों में ‘रिस्क-ऑफ’ माहौल बना रहा है.
क्रूड ऑयल और करेंसी मार्केट पर इसका असर कितना गहरा होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है. इसलिए विदेशी संस्थागत निवेशक निवेश से पहले कुछ समय तक हालात पर नजर बनाए रख सकते हैं.
2025 में एफआईआई का रुख रहा सतर्क
साल 2025 में विदेशी संस्थागत निवेशकों की चाल काफी उतार-चढ़ाव भरी रही. कुछ महीनों में उन्होंने खरीदारी जरूर की, लेकिन कुल मिलाकर उनका रुख निगेटिव ही रहा. भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट में देरी और भारतीय शेयरों के ऊंचे प्रीमियम वैल्यूएशन ने निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाला.
साल 2025 के दौरान एफआईआई ने भारतीय बाजार से कुल 1,66,286 करोड़ रुपये की निकासी की थी. जिससे साफ पता चलता है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बना रहे थे.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

