गुवाहाटी ने ‘सुरक्षा रीलोडेड’ के महा अभियान से जुड़ कर सड़क सुरक्षा को आगे बढ़ाया


गुवाहाटी में आयोजित ‘सुरक्षा रीलोडेड’ कॉन्सर्ट में नेतृत्व करने वाले प्रभावशाली स्वरों और प्रतिभाशाली लोगों की प्रस्तुतियों ने सभी को एक साथ लाकर सुरक्षित सड़कों के लिए साझा जिम्मेदारी का संदेश दिया. इस कार्यक्रम ने जागरूकता से आगे बढ़कर जिम्मेदारी की भावना को एक नया संबल प्रदान किया. यही उद्देश्य सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और NHAI द्वारा चलाए जा रहे ‘सड़क सुरक्षा अभियान’ का भी है.

यह पहल केवल नियमों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने पर जोर देती हुई आगे बढ़ी. ‘सुरक्षा रीलोडेड’ देशभर के शहरों में बातचीत, प्रस्तुतियों और जनभागीदारी के जरिए इस संदेश को आगे बढ़ा रहा है.

कार्यक्रम की शुरुआत बिनीता चेत्री के ऊर्जावान नृत्य प्रदर्शन से हुई, जिसने माहौल मैं एक नया जोश भर दिया और यह संदेश दिया कि सड़क सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है. इसके बाद रोशन के प्रोडक्शन्स की ‘प्रतिध्वनि आर्ट स्टूडियो’ टीम ने एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया. “यमराज को दूर रखने” की थीम पर आधारित इस नाटक में रोजमर्रा की घटनाओं के जरिए लापरवाही के परिणाम और जिम्मेदार व्यवहार का महत्व दिखाया गया.

इसके बाद प्रसिद्ध अभिनेता और फिल्म निर्माता जतिन बोरा ने मंच से भावनात्मक संदेश दिया. उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा सिर्फ अपने लिए नियम मानने तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरों की परवाह करना भी जरूरी है. उन्होंने ‘परवाह को कर्तव्य में बदलने’ की बात कही और बताया कि सड़क पर हमारा हर कदम किसी न किसी की जिंदगी को प्रभावित करता है.

स्टैंड-अप कॉमेडियन हरपाल सिंह ने हास्य के जरिए सड़क सुरक्षा जैसे गंभीर विषय को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया. उन्होंने हर दिन सड़क पर होने वाली लापरवाहियों को मज़ेदार अंदाज में दिखाकर लोगों को सोचने पर मजबूर किया.

गायिका दीप्तलीना डेका ने अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम में भावनात्मक गहराई जोड़ी. उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं के दौरान लोगों में दिखाई देने वाली संवेदनहीनता पर बात की और ‘राहवीर’ पहल का जिक्र किया, जिसमें दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वाले नागरिकों को सम्मानित और प्रोत्साहित किया जाता है. उन्होंने समय पर मदद और इंसानियत की अहमियत को रेखांकित किया.

यह कार्यक्रम सिर्फ प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं था, बल्कि एक बड़ा संदेश देकर गया —सड़क सुरक्षा कोई कठिन बात नहीं है. यह छोटे-छोटे फैसलों में छिपी है, जैसे हेलमेट पहनना, लेन अनुशासन का पालन करना, धीरे चलना और दूसरों का ध्यान रखना.

कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि सुरक्षित सड़कें केवल नियमों और व्यवस्था के तंत्र से नहीं, बल्कि लोगों के जिम्मेदार व्यवहार से बनती हैं.



Source link