चौंकाने वाला खुलासा! बड़े ब्रांड्स के हेडफोन में मिले खतरनाक केमिकल्स, स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

सतीश कुमार
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Headphones: एक हालिया लैब जांच ने मशहूर ऑडियो ब्रांड्स के हेडफोन को लेकर चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट के मुताबिक Bose, Samsung और Sennheiser जैसे नामी ब्रांड्स के मॉडल्स में ऐसे रसायन पाए गए हैं जिन्हें स्वास्थ्य के लिए संभावित रूप से हानिकारक माना जाता है. कुल 81 अलग-अलग हेडफोन मॉडल्स की जांच में हर सैंपल में जोखिम से जुड़े पदार्थ मिले.

किन सामग्रियों की हुई जांच?

यह परीक्षण ToxFREE LIFE for All नामक पहल के तहत किया गया जिसमें मध्य यूरोप की कई नागरिक संस्थाएं शामिल हैं. शोधकर्ताओं ने ओवर-ईयर और इन-ईयर दोनों तरह के हेडफोन खरीदे और उन प्लास्टिक व सिंथेटिक हिस्सों का विश्लेषण किया जो सीधे त्वचा के संपर्क में आते हैं. जांच में सबसे ज्यादा ध्यान प्लास्टिक में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स पर रहा क्योंकि यही हिस्से लंबे समय तक कान और त्वचा से चिपके रहते हैं.

बिस्फेनॉल और अन्य रसायनों की मौजूदगी

रिपोर्ट में बताया गया कि अधिकांश नमूनों में बिस्फेनॉल समूह के रसायन पाए गए. खासतौर पर BPA लगभग 98 प्रतिशत सैंपल में मिला जबकि बिस्फेनॉल S भी बड़ी संख्या में मौजूद था. इन दोनों को एंडोक्राइन डिसरप्टर माना जाता है यानी ये शरीर के हार्मोन सिस्टम में दखल दे सकते हैं.

इसके अलावा फ्थैलेट्स, क्लोरीनेटेड पैराफिन और कुछ फ्लेम रिटार्डेंट्स भी पाए गए. वैज्ञानिक अध्ययनों में इन रसायनों को प्रजनन संबंधी समस्याओं, लिवर और किडनी पर असर तथा कैंसर के संभावित खतरे से जोड़ा गया है.

लंबे इस्तेमाल से बढ़ सकता है जोखिम

हालांकि अधिकतर मामलों में रसायनों की मात्रा कम पाई गई लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि रोजाना और लंबे समय तक इस्तेमाल से जोखिम बढ़ सकता है. आजकल लोग हेडफोन कई घंटों तक पहनते हैं चाहे ऑफिस में काम करते समय, सफर के दौरान या जिम में एक्सरसाइज करते हुए. गर्मी और पसीने की स्थिति में प्लास्टिक से रसायनों का त्वचा तक पहुंचना और आसान हो सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार संपर्क और कई उत्पादों से एक साथ होने वाला एक्सपोजर मिलकर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है. इसे कॉकटेल इफेक्ट कहा जाता है जहां अलग-अलग स्रोतों से मिले रसायन मिलकर जोखिम बढ़ाते हैं.

पारदर्शिता और सख्त नियमों की मांग

इस जांच के बाद स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में अधिक पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया है. उनका मानना है कि ऐसे उत्पाद जो सीधे शरीर से संपर्क में रहते हैं उनके रासायनिक घटकों की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए.

विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को ध्यान में रखते हुए, एंडोक्राइन सिस्टम पर असर डालने वाले रसायनों के इस्तेमाल पर सख्त नियम बनाने की मांग उठ रही है. फिलहाल संबंधित कंपनियों की ओर से इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.