Russian Crude Oil: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump कई महीनों से यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों में जुटे हैं. इस क्रम में उन्होंने मॉस्को पर नए प्रतिबंध लगाए और रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों को भारी टैरिफ की चेतावनी दी. भारत पर भी रूस से रियायती तेल खरीदने को लेकर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की गई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया. हालांकि भारत ने हाल के महीनों में रूस से कच्चे तेल की खरीद कुछ कम की है, लेकिन इसके उलट चीन ने अपनी खरीद बढ़ा दी है.
ट्रंप की धमकियों से बेपरवाह
ट्रंप की चेतावनियों के बावजूद चीन फरवरी में रूस से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है. माना जा रहा है कि यह लगातार तीसरा महीना है जब चीन की रूसी तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. खासकर स्वतंत्र (इंडिपेंडेंट) रिफाइनर्स सस्ते रूसी तेल की जमकर खरीद कर रहे हैं. वोरटेक्स एनालिटिक्स के शुरुआती आकलन के अनुसार, फरवरी में रूस से चीन को रोजाना करीब 2.07 मिलियन बैरल कच्चे तेल की शिपमेंट हो रही है, जो जनवरी के लगभग 1.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन से काफी अधिक है.
वहीं, Kpler के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में यह आंकड़ा करीब 2.083 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जबकि जनवरी में यह 1.718 मिलियन बैरल प्रतिदिन था. दूसरी ओर, भारत ने रूसी तेल आयात में कटौती की है. केप्लर के डेटा के अनुसार, फरवरी में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात घटकर लगभग 1.159 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया.
भारत हटा पीछे, चीन बढ़ाई खरीदारी
मांग में कमी के चलते रूसी तेल की कीमतों में और नरमी आई, जिसका फायदा उठाते हुए चीन ने आयात और बढ़ा दिया. समाचार एजेंसी Reuters के मुताबिक, नवंबर के बाद से चीन रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है. पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और व्यापार समझौतों को लेकर नई दिल्ली पर बढ़ते दबाव के कारण भारत ने दो वर्षों में पहली बार नवंबर में रूस से तेल खरीद में उल्लेखनीय कटौती की थी.
कुल मिलाकर, जहां अमेरिका रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति पर काम कर रहा है, वहीं चीन सस्ते रूसी तेल का लाभ उठाकर अपनी ऊर्जा जरूरतें और रणनीतिक भंडार मजबूत कर रहा है.

