Islam: इस्लाम में माना जाता है कि, अगर कोई व्यक्ति किसी की सुंदरता, सेहत, सफलता या बच्चों को देखकर दिल में जलन, हैरानी या गलत भावना के साथ तारीफ करता है, तो उससे नजर लग सकती है.
इसे नजर या बुरी नजर भी कहा जाता है. इसका जिक्र हदीसों में भी देखने को मिलता है और रसूल करीम ने इससे बचने और इलाज का तरीका भी बताया है.
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नजर लगने का एक चर्चित वाकया
एक सहाबी के बारे में बताया जाता है कि, वह गर्मी में अपने घर के बाहर बैठे थे. उनका शरीर मजबूत और आकर्षक था. उसी दौरान एक दूसरे सहाबी वहां से गुजरे और देखकर कहा, माशा अल्लाह, क्या खूबसूरत और मजबूत जिस्म है.
इसके कुछ समय बाद सहाबी अचानक बेचैन हो गए, कांपने लगे और जमीन पर गिर पड़े. उन्हें मस्जिद-ए-नबवी में रसूल अल्लाह के पास ले जाया गया.
रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा कि, उन्हें किसने देखा और तारीफ की थी. जब वह सहाबी सामने आए तो उनसे पूछा गया कि, उन्होंने क्या कहा था. उन्होंने मेरे लिए सिर्फ तारीफ भरे शब्द कहे थे, लेकिन माशा अल्लाह और ला हौला वला कुव्वत इल्ला बिल्लाह नहीं कहा था.
आज के समय में नजर से बचाव कैसे करें?
आज कल लोग अपनी जिंदगी, बच्चों, शादी, सफलता और हर छोटी-से-छोटी खुशियों को सोशल मीडिया पर खुलेआम शेयर करते हैं. हर तारीफ हर सकारात्मक इरादे से नहीं आती. इसलिए सावधानी बेहद जरूरी है.
अगर हर किसी को वुजू करवाना या पानी प्रयोग करना संभव नहीं है, तो इस्लाम ने आसान और मजबूत बचाव के तरीके बताए हैं.
- आयतुल कुर्सी- 3 बार पढ़ें
- सूरह फलक- 3 बार पढ़ें
- सूरह नास- 3 बार पढ़ें
- सूरह कलम की आखिरी दो आयतें- 3 बार पढ़ें
इन आयतों को पढ़ने के बाद पानी पर दम करें और उसे पीने या घर में छिड़कने के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है. यह तरीका सुरक्षा और आत्मिक मजबूती प्रदान करता है.
सूरह कलम की आखिरी दो आयतें खास तौर से ताकतवर मानी जाती हैं, और बहुत लोग इन्हें नियमित रूप से पढ़ने की सलाह देते हैं.
तारीफ करते समय ये कहे?
हालांकि हर बार किसी समस्या को नजर से जोड़ देना भी सही नहीं है. बीमारियों, तनाव या समस्याएं कई कारणों से हो सकती हैं. पहले मेडिकल या सामान्य कारणों को देखें, फिर धार्मिक इलाज को अपनाएं.
इसके साथ ही जब भी किसी की तारीफ करें, तो साथ में माशा अल्लाह, बारकल्लाह या अल्लाह बरकत दे, जैसे शब्दों को जरूर जोड़ें. यह आदत नजर से बचाव का बेहद सरल तरीका है.
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