नीट पीजी कट-ऑफ विवाद, सरकार बोली कम अंक से डॉक्टर की योग्यता तय नहीं होती; जानें क्या है पूरा मामला ?

सतीश कुमार
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हाल ही में NEET-PG के कट-ऑफ अंकों में बड़ी कमी किए जाने के बाद देशभर में बहस तेज हो गई है. मेडिकल छात्रों, अभिभावकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच यह सवाल उठने लगा कि क्या इस फैसले से मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी. कई लोगों ने आशंका जताई कि कम अंक पर पीजी में दाखिला मिलने से भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों के स्तर पर असर पड़ सकता है.इसी बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि NEET-PG का मकसद किसी छात्र की न्यूनतम डॉक्टर के रूप में योग्यता तय करना नहीं है. सरकार के अनुसार, डॉक्टर बनने की असली पात्रता MBBS की पढ़ाई और इंटर्नशिप पूरी करने के साथ ही साबित हो जाती है. NEET-PG केवल एक प्रवेश परीक्षा है, जिसका उद्देश्य सीमित पोस्टग्रेजुएट (MD/MS) सीटों के लिए उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट तैयार करना है.

NEET-PG परीक्षा में बैठने वाला हर उम्मीदवार पहले से ही एक योग्य डॉक्टर होता है. वह 4.5 वर्ष की MBBS पढ़ाई पूरी कर चुका होता है और इसके बाद एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप भी कर चुका होता है. MBBS पास करने के लिए छात्रों को थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों परीक्षाओं में कम से कम 50 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी होता है. यानी NEET-PG देने से पहले ही उम्मीदवार आवश्यक मेडिकल प्रशिक्षण और योग्यता प्राप्त कर चुके होते हैं.

नए कट-ऑफ कितने हैं?
इस बार NEET PG का कट-ऑफ काफी कम रखा गया है. जनरल और EWS वर्ग के लिए कट-ऑफ 103 अंक तय किया गया है, जबकि जनरल पीडब्ल्यूडी  उम्मीदवारों के लिए यह 90 अंक है. वहीं एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग वर्ग के लिए कट-ऑफ -40 अंक निर्धारित किया गया है. कट-ऑफ में इस कमी के बाद अब पहले की तुलना में अधिक छात्र काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे और उन्हें पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीट पाने का अवसर मिल सकेगा.

कट-ऑफ कम क्यों किया गया?
कट-ऑफ कम करने के पीछे सरकार का मुख्य कारण यह बताया गया है कि बड़ी संख्या में पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटें हर साल खाली रह जाती थीं. लगभग 70,000 सीटें उपलब्ध होने के बावजूद सभी सीटों पर दाखिला नहीं हो पा रहा था, जबकि दो लाख से अधिक छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे.सरकार का कहना है कि मेडिकल सीटें सार्वजनिक संसाधनों से तैयार की जाती हैं, इसलिए उन्हें खाली छोड़ना नुकसानदायक है. इसी वजह से कट-ऑफ घटाया गया ताकि ज्यादा उम्मीदवार काउंसलिंग में शामिल हो सकें, सीटें खाली न रहें और देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जा सके.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.