जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि अब प्राइसिंग एडजस्टमेंट लागू होने के साथ सिगरेट बनाने वालों के लिए शॉर्ट-टर्म मार्जिन प्रेशर ज्यादा मैनेजेबल लगने लगा है.
उन्होंने कहा, ”दिसंबर तिमाही के नतीजे बताते हैं कि पहले की कमजोरी ज्यादातर टैक्स-ड्रिवेन थी, न कि डिमांड में किसी स्ट्रक्चरल स्लोडाउन की वजह से. रिटेल कीमत ज्यादा होने से कुछ समय के लिए वॉल्यूम पर असर जरूर डालते हैं, लेकिन सिगरेट कंपनियों ने भी ऐतिहासिक रूप से मजबूत प्राइसिंग पावर दिखा दिया है. इसके चलते ऊंचे टैक्स सिस्टम में भी प्रॉफिटेबिलिटी को बचाने में कामयाब रहे इसलिए हालिया वैल्यूएशन करेक्शन इन्वेस्टर्स के लिए खास मौके दे सकता है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो कैलिब्रेटेड प्राइस एक्शन के जरिए मार्जिन और कमाई बनाए रख सकती हैं.”
सिगरेट की क्यों बढ़ी कीमत?
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