पहाड़ों पर कार चलाते वक्त भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, एक्सपर्ट भी मानते हैं जरूरी


Last Updated:

दिल्ली-एनसीआर से पहाड़ों की ओर निकलने से पहले सिर्फ बैग पैक करना काफी नहीं है. घुमावदार सड़कें, तेज ढलान और बदलता मौसम छोटी-सी गलती को भी बड़े हादसे में बदल सकते हैं. अगर आप चाहते हैं कि आपका हिल स्टेशन ट्रिप सुरक्षित और यादगार रहे, तो ड्राइविंग से जुड़े ये 5 जरूरी टिप्स जरूर जान लें। इनमें से एक गलती आपकी पूरी यात्रा पर भारी पड़ सकती है.

ख़बरें फटाफट

पहाड़ों पर कार चलाते वक्त भूलकर भी न करें ये 5 गलतियांZoom

पहाड़ी ड्राइविंग के दौरान जरूर फॉलो करें ये 5 टिप्स.

अगर आप दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरी इलाकों से गर्मी से बचने के लिए पहाड़ों की सैर करना चाहते हैं, तो मनोरम नज़ारों, ठंडी हवाओं और शांति की तलाश में हिमालयी रास्तों का रुख करना स्वाभाविक है. लेकिन ये खूबसूरत सफर चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है. ऊंची चोटियों, घुमावदार सड़कों, तेज ढलानों और अप्रत्याशित मौसम के बीच ड्राइविंग सामान्य शहर की ड्राइविंग से बिल्कुल अलग होती है.

अनुभवी ड्राइवर भी यहां छोटी-छोटी गलतियों को लेकर दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं. इसलिए सुरक्षित ड्राइविंग के नियमों का पालन जरूरी है, ताकि आपका ट्रिप यादगार बने और सुरक्षित घर वापसी हो. सही तैयारी, सतर्कता और अनुशासन से आप पहाड़ों की खूबसूरती का पूरा मजा ले सकते हैं. आइए ऐसे में 5 जरूरी टिप्स पर एक नज़र डालते हैं.

पूरी तैयारी करें

पहाड़ी यात्रा से पहले अपनी गाड़ी को सर्विस सेंटर पर जरूर चेक करवाएं. ब्रेक, क्लच, इंजन कूलिंग सिस्टम, टायर प्रेशर और स्पेयर टायर की कंडीशन देखें. पहाड़ों पर इंजन ज्यादा गर्म होता है, इसलिए कूलेंट और इंजन ऑयल लेवल सही रखें. 4WD या अच्छी ग्रिप वाले टायर बेहतर होते हैं. अतिरिक्त पानी, टॉर्च, टूल किट, फर्स्ट एड किट और एक्स्ट्रा फ्यूल साथ रखें. दिल्ली से निकलने से पहले मौसम रिपोर्ट और रोड कंडीशन चेक करें. गाड़ी को ओवरलोड न करें. ये छोटी-छोटी तैयारियां बड़ी मुसीबत से बचा सकती हैं.

धीमी और नियंत्रित गति से ड्राइव करें

पहाड़ी सड़कों पर स्पीड 40-50 किमी/घंटा से ज्यादा न रखें. तेज मोड़ों पर आने वाली गाड़ियों से एक्सीडेंट और पत्थर गिरने का खतरा हमेशा रहता है. हमेशा गियर में रहकर ब्रेक का इस्तेमाल कम करें. डाउनहिल पर इंजन ब्रेकिंग का सहारा लें. हॉर्न का लगातार इस्तेमाल करें, खासकर ब्लाइंड कर्व्स पर. दूसरी गाड़ियों को ओवरटेक करने से बचें और उन्हें रास्ता दें. रात में ड्राइविंग टालें क्योंकि फॉग और कम विजिबिलिटी खतरनाक होती हैं.

मौसम और रोड कंडीशन पर नजर रखें

पहाड़ों का मौसम पल भर में बदल जाता है. बारिश, बर्फबारी या लैंडस्लाइड की खबर पहले से चेक करें. स्लिपरी रोड पर ब्रेक को हल्के-हल्के दबाएं. अगर कोहरा छा जाए तो हैजर्ड लाइट जलाकर धीरे चलें. खड़ी चढ़ाई पर गाड़ी का इंजन ज्यादा काम करता है, इसलिए बीच-बीच में रुककर इंजन को ठंडा होने दें. लोकल लोगों या ट्रैफिक पुलिस से रूट की जानकारी लें. हमेशा अपडेटेड मैप या GPS ऐप का इस्तेमाल करें.

थकान से बचें और ब्रेक लें

लंबी ड्राइव में हर 2-2.5 घंटे में 10-15 मिनट का ब्रेक जरूर लें. पहाड़ी रास्तों पर लगातार घुमाव और ऊंचाई के कारण थकान जल्दी आती है. कॉफी या हल्का नाश्ता लें, लेकिन दारू या नींद लाने वाली दवाएं बिल्कुल न लें. ड्राइवर बदलते रहें अगर संभव हो. खिड़कियां खुली रखें ताकि ताज़ी हवा आए. थके हुए हालत में ड्राइविंग सबसे बड़ा खतरा है.

इमरजेंसी के लिए तैयार रहें

अगर गाड़ी खराब हो जाए तो सड़क के किनारे पार्क करके हैजर्ड लाइट जलाएं. रस्सी, चेन और रिफ्लेक्टर साथ रखें. मोबाइल में जरूरी नंबर्स (टोल फ्री हेल्पलाइन, लोकल पुलिस) सेव रखें. बच्चों और बुजुर्गों को सीट बेल्ट लगाने पर जोर दें. सूर्यास्त के बाद या खराब मौसम में रुकना बेहतर है जोखिम लेने की बजाय. सतर्क रहें तो हर ट्रिप सुरक्षित और आनंददायक बनेगी.

About the Author

Ram Mohan MishraSenior Sub Editor

न्यूज़18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के रूप में कार्यरत राम मोहन मिश्र 2021 से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और फिलहाल ऑटो डेस्क संभाल रहे हैं. वे कार और बाइक से जुड़ी जानकारी को आसान, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से …और पढ़ें





Source link