फोन है या जासूस? आप बैठे हों या लेटे, कैमरा-माइक बंद होने पर भी सब ट्रैक कर लेता है आपका स्मार्टफोन! जानिए कैसे

सतीश कुमार
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Smartphone Tips: आज का स्मार्टफोन सिर्फ कॉल और मैसेज का जरिया नहीं रह गया है. यह हमारी दिनचर्या, पसंद-नापसंद, लोकेशन और यहां तक कि हमारी गतिविधियों तक को समझने लगा है. कई लोगों को लगता है कि अगर कैमरा बंद है और माइक्रोफोन म्यूट है तो फोन कुछ भी रिकॉर्ड नहीं कर सकता. लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग और ज्यादा जटिल है.

कैमरा-माइक नहीं सेंसर करते हैं काम

स्मार्टफोन में सिर्फ कैमरा और माइक्रोफोन ही नहीं होते बल्कि कई तरह के सेंसर भी लगे होते हैं. एक्सेलेरोमीटर, जाइरोस्कोप, प्रॉक्सिमिटी सेंसर और जीपीएस जैसे फीचर्स यह समझ सकते हैं कि आप चल रहे हैं, बैठे हैं या लेटे हुए हैं. फिटनेस ऐप्स इसी तकनीक की मदद से आपके कदम गिनते हैं और आपकी गतिविधियों का विश्लेषण करते हैं. यानी कैमरा बंद होने पर भी फोन को आपकी बॉडी मूवमेंट की जानकारी मिलती रहती है.

ऐप्स की परमिशन का खेल

अक्सर हम बिना पढ़े किसी भी ऐप को इंस्टॉल करते समय सभी परमिशन दे देते हैं. यही सबसे बड़ी गलती होती है. कई ऐप्स लोकेशन, मोशन डेटा और बैकग्राउंड एक्टिविटी की अनुमति लेकर लगातार डेटा इकट्ठा करती रहती हैं. यही डेटा बाद में विज्ञापन या सुझावों के रूप में सामने आता है. अगर आपने कभी सोचा हो कि किसी चीज़ के बारे में सोचते ही उसका विज्ञापन क्यों दिखने लगता है तो इसके पीछे यही डेटा एनालिसिस काम करता है.

क्या सच में जासूसी हो रही है?

यह कहना गलत होगा कि हर स्मार्टफोन जानबूझकर जासूसी कर रहा है. बड़ी टेक कंपनियां जैसे Google और Apple दावा करती हैं कि वे यूजर की प्राइवेसी को प्राथमिकता देती हैं. लेकिन यह भी सच है कि डेटा आज की डिजिटल दुनिया का सबसे कीमती संसाधन बन चुका है. कंपनियां यूजर व्यवहार को समझने के लिए एनालिटिक्स टूल्स का इस्तेमाल करती हैं जिससे उन्हें बेहतर सेवाएं और टार्गेटेड कंटेंट देने में मदद मिलती है.

खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

अगर आप अपनी प्राइवेसी को लेकर चिंतित हैं तो सबसे पहले ऐप परमिशन की जांच करें. अनावश्यक लोकेशन और माइक्रोफोन एक्सेस को बंद रखें. फोन की सेटिंग्स में जाकर प्राइवेसी डैशबोर्ड देखें और समझें कि कौन-सा ऐप कितना डेटा इस्तेमाल कर रहा है. साथ ही, समय-समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट जरूर करें, क्योंकि इनमें सुरक्षा सुधार शामिल होते हैं.

आखिरकार, आपका फोन जासूस नहीं है, लेकिन अगर आप लापरवाह हैं तो यह आपके बारे में बहुत कुछ जान सकता है. समझदारी इसी में है कि तकनीक का इस्तेमाल करें लेकिन उसकी शर्तों को समझते हुए.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.