How to be a better driver: लीगल एज होते ही लगभग सभी चाहते हैं कि उनके हाथ में गाड़ी की स्टीयरिंग हो. इसके लिए सबसे पहले लर्नर लाइसेंस ली जाती है और फिर ड्राइविंग सीखने के बाद RTO से पक्की लाइसेंस मिलती है. हालांकि, एक बेहतर ड्राइवर बनने में लोगों काफी समय लग जाता है. सड़क पर चलते समय हम अपने साथ गाड़ी में बैठे लोगों और सड़क पर चल रहे यात्रियों की सुरक्षा के साथ भी जुड़े होते हैं.
1. सही ड्राइविंग पोजीशन अपनाएं
अपनी सीट को इस तरह एडजस्ट करें कि पीठ पूरी तरह से बैकरेस्ट से सटी रहे, घुटने हल्के मुड़े हों और पैर ब्रेक-एक्सीलरेटर तक आसानी से पहुंचें. स्टीयरिंग व्हील को 9 बजकर 15 मिनट की पोजीशन में पकड़ें, जिससे हाथों में बेहतर कंट्रोल मिलता है और अचानक मोड़ या इमरजेंसी में तुरंत रिएक्ट कर पाते हैं. गलत पोजीशन से लंबी ड्राइविंग में कमर दर्द, गर्दन में अकड़न और थकान जल्दी हो जाती है. सही पोजीशन अपनाने से आप ज्यादा देर तक फ्रेश रहते हैं और गाड़ी पर पूरा नियंत्रण बना रहता है.
2. डिफेंसिव ड्राइविंग का अभ्यास करें
हमेशा ये सोचकर चलें कि सड़क पर कोई भी दूसरा ड्राइवर कभी भी गलती कर सकता है. सामने वाली गाड़ी से कम से कम 3-4 सेकंड की सुरक्षित दूरी बनाए रखें. रियर व्यू मिरर और दोनों साइड मिरर पर लगातार नजर रखें, ब्लाइंड स्पॉट चेक करें और ओवरटेकिंग से पहले दो बार देखें. अचानक ब्रेक लगाने से पहले पीछे देखें, इंडिकेटर दें और धीरे-धीरे स्पीड कम करें. ये आदत अपनाने से आप दूसरों की गलतियों से बच सकते हैं और खुद को सुरक्षित रख सकते हैं.
3. ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करें
स्पीड लिमिट कभी न तोड़ें, चाहे रास्ता कितना भी खाली लगे. हमेशा निर्धारित लेन में रहें, लेन बदलते या मुड़ते समय इंडिकेटर जरूर दें और हॉर्न का इस्तेमाल केवल जरूरत पड़ने पर करें. सीट बेल्ट खुद और सभी पैसेंजर्स के लिए अनिवार्य है. ये छोटी आदत बड़े हादसों में जान बचा सकती है. रोड रेज से पूरी तरह दूर रहें, गुस्से में कोई गलत हरकत न करें.
4. ध्यान भटकeने वाली चीजों से दूर रहें
ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन बिल्कुल न छुएं- न कॉल, न मैसेज, न सोशल मीडिया. हैंड्सफ्री का इस्तेमाल भी कम से कम करें क्योंकि ध्यान बंटता है. खाना-पीना, सिगरेट जलाना, रेडियो/म्यूजिक में ज्यादा उलझना या बातों में लग जाना भी खतरनाक है. अगर बहुत थकान लग रही हो, नींद आ रही हो या आंखें भारी हों तो तुरंत सुरक्षित जगह पर गाड़ी रोकें और आराम करें.
5. गाड़ी का रेगुलर मेंटेनेंस और प्रैक्टिस
हर हफ्ते टायर का प्रेशर, ब्रेक कंडीशन, इंजन ऑयल, कूलेंट, बैटरी और सभी लाइट्स चेक करें. खराब गाड़ी से ब्रेक फेल होना या टायर फटना जैसे हादसे हो सकते हैं. अलग-अलग स्थितियों में प्रैक्टिस करें. इसमें भीड़भाड़ वाला ट्रैफिक, बारिश, रात, ढलान वाली सड़क और हाईवे को शामिल करें. शुरुआत में धीरे चलाएं और फिर आत्मविश्वास बढ़ाएं. कभी भी ओवर स्पीडिंग न करें.