India Brazil Rare Earth Deal ; रेयर अर्थ मामले में होने वाला है ‘खेला’, चीन को लगेगी मिर्ची

सतीश कुमार
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India Brazil Rare Earth Deal: आगामी 18 से 22 फरवरी के बीच ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा का भारत दौरा होने वाला हैं. इस राजनीतिक यात्रा के बहुत से मायने निकाले जा रहे हैं. जहां पूरी दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता और वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल का माहौल है, वहीं इस समय ब्राजील के राष्ट्रपति का यह दौरा दोनों ही देशों के लिए नए रास्ते खोल सकता है.

ब्राजील के राजदूत केनेथ एच. दा नोब्रेगा ने इस यात्रा को लेकर संकेत भी दिए हैं. उन्होंने कहा हैं कि, यह यात्रा दोनों ही देशों के फार्मास्यूटिकल्स, रेयर अर्थ और आपसी सहयोग के क्षेत्र में बड़ा कदम साबित हो सकता है. उनके इस बयान के बाद रेयर अर्थ को लेकर चीन समेत पूरी दुनिया की नजर भारत- ब्राजील के बीच होने वाली बातचीत पर होगी….

भारत–ब्राजील व्यापार को नई ऊंचाई देने का लक्ष्य

बदलते वैश्विक माहौल में जब सप्लाई चेन पर दबाव है और पारंपरिक व्यापार मार्ग कमजोर पड़ रहे हैं. ऐसे समय में भारत, ब्राजील के साथ आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने का प्रयास कर रहा हैं. भारत लैटिन अमेरिका में अपनी मौजूदगी को और अधिक मजबूत करना चाहता हैं.

वहीं, ब्राजील अमेरिका और चीन जैसे पुराने साझेदारों पर अपनी निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहा हैं. दोनों देशों के बीच अगर डील होती है तो दोनों के लक्ष्यों की पूर्ति होगी. इसी कड़ी में दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा करीब 12.19 अरब डॉलर से बढ़ाकर 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है.

रेयर अर्थ डील से चीन को लगेगी मिर्ची

पूरी दुनिया रेयर अर्थ के लिए चीन पर अत्यधिक निर्भर है. चीन के पास वैश्विक रेयर अर्थ खजाने का एक बड़ा हिस्सा है. यही कारण है कि चीन रेयर अर्थ के मामले में अपनी चाल चलता रहता है. वहीं, ब्राजील के पास रेयर अर्थ मिनरल का एक बड़ा स्रोत मौजूद हैं. स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए जरूरी लिथियम समेत कई अहम खनिजों के भंडार के मामले में ब्राजील मजबूत स्थिति में है.

भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और बैटरी निर्माण को ध्यान में रखते हुए इन खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत करना चाहता है. साथ ही इस डील से चीन पर निर्भरता भी कम होगी और भारत के लिए दूसरे विकल्प के दस्वाजे खुलेंगे. ऐसे में इस क्षेत्र में होने वाला संभावित समझौता भारत के लिए सिर्फ कारोबारी सौदा नहीं है. बल्कि भविष्य की तकनीकी और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देने वाला कदम होगा.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.