India Iran Trade Relations: पूरी दुनिया की नजर इस वक्त ईरान और इजरायल के बीच चल रहे विवाद पर है. अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया है. जिसके जवाब में ईरान की ओर से भी जवाबी कार्यवाही चल रही है.
इस विवाद का असर पूरी दुनिया पर देखने को मिल सकता है. अब सवाल उठता है कि, इस युद्ध से भारत और ईरान के बीच होने वाले व्यापार पर क्या असर होगा. आइए जानते हैं, इस बारे में…
भारत और ईरान के बीच पुराने व्यापारिक संबंध
दोनों देशों के बीच संबंध कई साल पुराने हैं. ईरान अपनी दैनिक जरूरतों की बहुत सी चीजों के लिए भारत पर निर्भर है. वहीं भारत भी कच्चे तेल और मध्य एशिया तक अपनी पहुंच बनाने के लिए ईरान की सहायता चाहता है. साथ ही भारत-ईरान के संबंध केवल व्यापारिक नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव भी दोनों देशों को जोड़ने का काम करता है.
ईरान के साथ भारत का व्यापारिक जुड़ाव
ऊर्जा के क्षेत्र में ईरान लंबे समय से भारत का अहम साझेदार रहा है और वह भारत को कच्चा तेल सप्लाई करता रहा है. अमेरिकी प्रतिबंधों के दौर में भी दोनों देशों के व्यापारिक संबंध पूरी तरह खत्म नहीं हुए. वहीं भारत से ईरान को दवाइयां, चावल, गेहूं, चीनी और सूती कपड़े जैसी जरूरी चीजें निर्यात की जाती हैं.
इन वस्तुओं की मांग ईरान में अच्छी-खासी है. खासतौर पर बासमती चावल का ईरान बड़ा खरीदार रहा है. इसके अलावा चाय, चीनी, ऑटो पार्ट्स, दवाएं और कुछ इंजीनियरिंग उत्पाद भी भारत से ईरान भेजे जाते हैं.
ईरान से किन उत्पादों का आयात करता है भारत
भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में ईरान की अहम भूमिका रही है. भारत वहां से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करता रहा है. इसके अलावा ईरान से पिस्ता और खजूर जैसे सूखे मेवे, कुछ विशेष केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल उत्पाद और कांच के बर्तन भी आयात किए जाते हैं.
चाबहार पोर्ट में भारत का निवेश
व्यापार और कनेक्टिविटी को मजबूत करने के मकसद से भारत, ईरान के चाबहार बंदरगाह में बड़ा निवेश कर रहा है. यह प्रोजेक्ट सिर्फ कारोबारी नहीं, बल्कि कूटनीतिक लिहाज से भी अहम माना जाता है. क्योंकि इसके जरिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक सामान पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक रास्ता मिलता है.
यह भी पढ़ें: गिरते बाजार में कमाई का मौका! घरेलू समेत ग्लोबल ब्रोकरेज फर्मों ने कहा खरीद लें, हो सकता है तगड़ा मुनाफा

