भारत में EV का जलवा! लोग तेजी से छोड़ रहे पेट्रोल-डीजल कारें, जानिए क्यों बढ़ा Electric Vehicles का क्रेज


अगर आप आज भी पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के गणित में उलझे हैं, माइलेज का हिसाब लगा रहे हैं या हर हफ्ते फ्यूल स्टेशन के चक्कर काट रहे हैं, तो जरा ठहरिए! देश की एक बड़ी आबादी अब इस झंझट से आगे निकल चुकी है. जब आप पेट्रोल पंप की कतारों में खड़े होने की सोच रहे होते हैं, ठीक उसी वक्त इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) शोरूम पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ रही है.

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक खामोश लेकिन बेहद रफ्तार वाली क्रांति चल रही है. डेटा गवाह है कि भारतीय ग्राहकों का भरोसा अब पारंपरिक ईंधन से उठकर ‘ग्रीन मोबिलिटी’ की तरफ तेजी से शिफ्ट हो रहा है. अगर आप आने वाले दिनों में एक कार खरीदने का प्लान कर रहे हैं और आप जानना चाहते हैं कि आपकी अगली गाड़ी एक Electric Car ही क्यों होनी चाहिए, तो हमारा ये आर्किटल आपके काम का है.

EV सेल तोड़ रही रिकॉर्ड

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) और सरकारी वाहन पोर्टल के हालिया आंकड़ों पर नजर डालें, तो ईवी की रफ्तार आपको चौंका देगी. आंकड़ें इस प्रकार हैं-

  • सालाना ग्रोथ में भारी उछाल: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल बिक्री ने पिछले वित्तीय वर्षों के मुकाबले लगभग 35% से 40% तक की सालाना वृद्धि दर्ज की है.
  • टू-व्हीलर्स का दबदबा: ईवी क्रांति की कमान देश के युवाओं और मिडिल क्लास ने संभाली है. कुल इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में अकेले इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स (स्कूटर और बाइक) की हिस्सेदारी 55% से ज्यादा है. ओला, एथर, टीवीएस और बजाज जैसी कंपनियां हर महीने हजारों यूनिट्स बेच रही हैं.
  • थ्री-व्हीलर सेगमेंट में क्रांति: कमर्शियल सेगमेंट में तो खेल पूरी तरह बदल चुका है. देश में बिकने वाले कुल थ्री-व्हीलर्स (ऑटो रिक्शा और लोडर) में से 50% से अधिक अब इलेक्ट्रिक हो चुके हैं. लोकल ट्रांसपोर्ट और डिलीवरी का पूरा ढांचा बिजली पर शिफ्ट हो रहा है.
  • कार मार्केट में भी रफ्तार: टाटा मोटर्स, एमजी और महिंद्रा जैसी कंपनियों के बूते इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में भी सालाना स्तर पर 90% तक की ग्रोथ देखी गई है.

पेट्रोल-डीजल छोड़ ईवी क्यों चुन रहे लोग?

आखिर ऐसा क्या हुआ कि लोग अचानक पेट्रोल-डीजल को ‘बाय-बाय’ कहने लगे? इसके पीछे कुछ बेहद ठोस और व्यावहारिक कारण हैं. आइए, इन्हें भी एक-एक कर जानने की कोशिश करते हैं-

1. जेब पर भारी बचत: जहां पेट्रोल कार चलाने का खर्च औसतन 7 से 9 रुपये प्रति किलोमीटर आता है, वहीं एक इलेक्ट्रिक कार मात्र 1 से 1.5 रुपये प्रति किलोमीटर में चल जाती है. टू-व्हीलर्स में ये खर्च और भी कम (लगभग 25 से 30 पैसे प्रति किलोमीटर) है.

2. मेंटेनेंस का झंझट खत्म: पारंपरिक इंजन में सैकड़ों मूविंग पार्ट्स होते हैं. इसमें इंजन ऑयल, फिल्टर, स्पार्क प्लग, गियरबॉक्स जैसी चीजें शामिल हैं. ईवी में ये सब झंझट ही नहीं है. नो इंजन, नो ऑयल चेंज, यानी मेंटेनेंस का खर्च लगभग जीरो.

3. बढ़ती रेंज और इंफ्रास्ट्रक्चर: पहले लोगों को डर था कि बैटरी खत्म हो गई तो क्या होगा. लेकिन अब गाड़ियां एक सिंगल चार्ज में 150 से 500 किलोमीटर तक की रेंज दे रही हैं. साथ ही, हाईवे से लेकर सोसाइटी तक चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछ चुका है.

फ्यूचर EV है!

एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय ऑटो बाजार अब उस टर्निंग पॉइंट पर पहुंच चुका है, जहां से वापसी मुमकिन नहीं है. सरकार की फेम (FAME) योजना, पीएलआई स्कीम और राज्य सरकारों द्वारा दी जा रही टैक्स छूट ने इस रफ्तार को दोगुना कर दिया है. तो अगली बार जब आप कार या बाइक खरीदने की सोचें, तो सिर्फ पेट्रोल और डीजल के वेरिएंट्स मत देखिएगा. बाजार का रुख साफ है. दुनिया बदल रही है और गाड़ियां अब पेट्रोल पंप पर नहीं, घर के प्लग पॉइंट पर चार्ज हो रही हैं.



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