Yudhishthira wife Devika in the Mahabharata: महाभारत महाकाव्य में युधिष्ठिर एक प्रमुख पात्र होने के साथ-साथ अनुशासन और न्यायपरायण व्यक्ति भी हैं, फिर भी उनकी पत्नी को लेकर रहस्य बना रहता है. सार्वजनिक रूप से उन्हें युधिष्ठिर के साथ कम ही देखा गया है, वे उनके वनवास के दौरान भी उनके साथ नहीं थीं, और न ही स्वर्ग की यात्रा के दौरान भी.
पांडवों में सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर की द्रौपदी के अलावा एक और पत्नी थी, जिनका नाम देविका था. वह शिव राज्य के राजा गोवसेना की बेटी और क्षत्रिय राजकुमारी भी थीं. उनकी प्रमुख भूमिका के बाद भी महाभारत में उनसे जुड़ी कम ही जानकारी देखने को मिलती है, जिससे वे कहीं न कहीं एक रहस्यमयी व्यक्तित्व बनी हुई हैं.
वनवास काल से पहले युधिष्ठिर ने देविका से रचाई थी शादी?
दरअसल देविका का विवाह युधिष्ठिर से वनवास काल से पहले हुआ था, हालांकि उन्होंने द्रौपदी के बाद युधिष्ठिर से विवाह किया था. युधिष्ठिर ने राजा द्रुपद से पहली मुलाकात में खुद को अविवाहित बताया था, जबकि उनका विवाह पहले ही देविका से हो चुका था.
उनकी शादी के समय को लेकर समय सटीक नहीं है, कुछ स्त्रोतों में कहा गया है कि, यह युधिष्ठिर के युवराज के रूप में राज्याभिषेक के बाद हुई थी, जबकि अन्य का दावा है कि, यह कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद हुई थी.
युधिष्ठिर और देविका का पुत्र यौधेय
पांडवों के 14 वर्ष के वनवास के दौरान देविका उनके साथ जाने के बजाय युधिष्ठिर की माता कुंती के साथ ही रहीं. युधिष्ठिर और देविका का एक पुत्र भी था, जिसका नाम यौधेय था. महाभारत में पांडव की तरफ से लड़ते हुए युधिष्ठिर का बेटा वीर गति को प्राप्त हुआ.
देविका को एक पवित्र स्त्री के रूप में जाना जाता है, महाकाव्य में स्त्रियों के बीच रत्न के समान पूजनीय स्थान रखती थीं. वे हस्तिनापुर और इंद्रप्रस्थ में युधिष्ठिर के साथ रहती थीं, जो उनके प्रति दयालु और स्नेहपूर्ण व्यवहार करते थे.
देविका को यमधर्म की पत्नी माता उर्मिला का अवतार भी माना जाता है, और वे भगवान कृष्ण की परम भक्तों में शामिल थीं.
महाभारत के आदिपर्व अध्याय में देविका वर्णन
महाभारत के आदिपर्व अध्याय में देविका का संक्षिप्त वर्णन देखने को मिलता है. उनका चरित्र काफी उल्लेखनीय था, लेकिन द्रौपदी की सम्मोहक कहानी के आगे फीका पड़ गया, जिस वजह से उनका जीवन अपेक्षाकृत शांत और पृष्ठभूमि में ही बीता. इसके बावजूद उन्होंने द्रौपदी के साथ अच्छे संबंध को प्राथमिकता दी और तो और सभी पांडव भी उनका सम्मान करते थे और उनके प्रति मातृत्व का भाव रखते थे.
देविका की मृत्यु को लेकर ग्रंथ में कहीं भी उल्लेख नहीं है. मान्यताओं के मुताबिक, युधिष्ठिर की हिमालय यात्रा के आखिरी चरण में ही उनकी मौत हो गई थी या बाद में उनका निधन हुआ था.
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