ये हैं मौत से पहले के 12 संकेत जिन्हें देखकर डॉक्टर भी कर देते हैं हाथ खड़े, जानिए कैसे आखिरी सांसे गिनता है मरीज

सतीश कुमार
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मृत्यु जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई है, लेकिन इसके बारे में बात करना आज भी लोगों को असहज कर देता है.  जब कोई अपना गंभीर रूप से बीमार होता है और उसका शरीर जवाब देने लगता है, तब परिवार के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अब क्या होने वाला है. डॉक्टर, नर्स और हॉस्पिस केयर में काम करने वाले लोग अक्सर कुछ ऐसे शारीरिक और मानसिक बदलाव पहचान लेते हैं, जो बताते हैं कि इंसान अपने जीवन के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है. ये संकेत डराने के लिए नहीं होते, बल्कि इसलिए जरूरी हैं ताकि मरीज को कम से कम दर्द, ज्यादा से ज्यादा आराम के साथ ध्यान रखा जा सके. तो आइए आज हम आपको वे 12 संकेत बताते हैं, जो आमतौर पर मौत से पहले दिखाई देते हैं. 

ये हैं मौत से पहले के 12 संकेत

1. लगातार थकान और कमजोरी – मरीज दिन का ज्यादातर समय सोते हुए बिताने लगता है. थोड़ा सा बोलना या हिलना-डुलना भी उसे थका देता है. यह आलस नहीं, बल्कि शरीर की एनर्जी खत्म होने का संकेत होता है. 

2. भूख और प्यास का कम हो जाना – अंतिम समय में शरीर को ज्यादा खाना या पानी की जरूरत नहीं रहती, मरीज खुद खाने-पीने से मना कर सकता है. यह स्वाभाविक प्रक्रिया है. 

3. सांस लेने में तकलीफ – सांस फूलना, तेज या बहुत धीमी सांसें चलना आम बात है. कभी-कभी बिना किसी मेहनत के भी सांस लेने में परेशानी होती है. इस समय ऑक्सीजन, दवाइयां और शांत वातावरण मदद करता है. 

4. दर्द का बढ़ना या बदलना – हर मरीज को दर्द एक-सा नहीं होता, कुछ को ज्यादा, कुछ को कम, कैंसर, फेफड़ों की बीमारी या मानसिक तनाव दर्द को बढ़ा सकता है. डॉक्टर अक्सर दवाइयां देकर दर्द को काबू में रखते हैं. 

5. चिंता और बेचैनी – मरीज बेचैन हो सकता है, बार-बार करवट बदलता है, पसीना आता है. नींद नहीं आती या डर महसूस होता है. यह मौत के डर या मानसिक थकान की वजह से हो सकता है. इस समय प्यार भरी बातों और दवाओं से राहत मिलती है. 

6. मतली और उल्टी – अंतिम समय में पेट ठीक से काम नहीं करता, कभी दवाओं से, कभी कब्ज से मतली हो सकती है. हल्का खाना, ताजी हवा और डॉक्टर की दवाइयां मददगार होती हैं. 

7. कब्ज  – कम खाना, कम पानी पीना और दर्द की दवाइयां कब्ज पैदा करती हैं. यह तकलीफदेह हो सकता है. डॉक्टर दवाएं या इंजेक्शन देकर राहत दिलाते हैं. 

8. अकेलापन और लोगों से दूरी – मरीज धीरे-धीरे कम बोलने लगता है, मिलना-जुलना कम कर देता है, यहां तक कि अपनों से भी, यह उदासी नहीं, बल्कि अंदर की तैयारी होती है. ऐसे में बस पास बैठकर हाथ पकड़ना भी बहुत सुकून देता है. 

9. पेशाब और मल पर नियंत्रण न रहना – शरीर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. मरीज को पेशाब या शौच पर नियंत्रण नहीं रहता, इस समय साफ-सफाई बहुत जरूरी होती है ताकि संक्रमण न हो. 

10. हाथ-पैर ठंडे पड़ना और त्वचा का रंग बदलना – खून का बहाव कम होने लगता है. हाथ-पैर ठंडे, त्वचा पर नीले या बैंगनी धब्बे दिख सकते हैं. होंठ और नाखून नीले पड़ सकते हैं. यह साफ संकेत है कि शरीर धीरे-धीरे बंद हो रहा है. 

11. भ्रम और प्रलाप (Delirium) –  मरीज ऐसी बातें कर सकता है जो समझ में न आएं. कभी किसी को देखना या सुनना जो मौजूद न हो. यह ऑक्सीजन की कमी, दवाओं या किडनी फेल होने की वजह से होता है. 

12. डेथ रेटल यानी मौत की घरघराहट – यह आखिरी और सबसे साफ संकेत होता है. सांस लेते समय घरघराहट या घड़घड़ाहट की आवाज आती है. असल में मरीज को दर्द नहीं होता, लेकिन आवाज सुनकर घबरा जाता है. ऐसे में करवट बदलना और सिर ऊंचा रखना मदद करता है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.