- ऑस्ट्रेलिया ने बच्चों की मानसिक सेहत हेतु सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया।
- एक नए सर्वे ने इस प्रतिबंध की प्रभावहीनता को उजागर किया।
- सर्वे में 85% बच्चे अब भी सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे।
- बच्चे फर्जी खाते, प्राइवेट ब्राउजिंग से प्रतिबंध को दरकिनार करते हैं।
Social Media Ban For Kids: ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया में सबसे पहले 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर ताला लगाया था. इसके बाद यूके और यूएई ने भी ऐसे कानून पास कर 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया यूज करने पर पाबंदी लगा दी है. अब एक सर्वे ने ऑस्ट्रेलिया के कानून की पोल खोलकर रख दी है. इसमें सामने आया है कि सोशल मीडिया बैन करने का खास असर नजर नहीं आ रहा है और बच्चे अब भी पहले की तरह सोशल मीडिया यूज कर रहे हैं.
पिछले साल आया था कानून
ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल दिसंबर में सोशल मीडिया पर ताला लगाने वाला कानून पास किया था. इसके बाद बच्चों के लिए टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और स्नैपचैट आदि प्लेटफॉर्म पर अकाउंट क्रिएट करने पर रोक लग गई. बच्चों की मेंटल हेल्थ पर सोशल मीडिया के बुरे प्रभाव को रोकने के लिए यह कानून लाया गया था.
सर्वे में सामने आई हकीकत
The BMJ नाम के एक मेडिकल जर्नल में छपी स्टडी ने इस कानून के असर की सच्चाई सामने रख दी है. इस कानून का असर जानने के लिए दो सर्वे किए गए. 12-17 साल के 400 से अधिक टीनएजर्स पर पहला सर्वे कानून लागू होने से पहले, जबकि दूसरा सर्वे कानून लागू होने के तीन महीने बाद किया गया था. इनमें सोशल मीडिया के इस्तेमाल, रोजाना सोशल मीडिया पर व्यतीत होने वाले समय, अकाउंट को एक्सेस करने के तरीके और एज-वेरिफिकेशन से जुड़े सवाल किए गए थे. दूसरे सर्वे में उनसे यह भी पूछा गया कि क्या उन्होंने बैन से बचने के कोई दूसरे तरीके भी इस्तेमाल किए हैं.
ज्यादातर बच्चे यूज कर रहे हैं सोशल मीडिया
सर्वे में जो नतीजे सामने आए हैं, वो बता रहे हैं कि ऑस्ट्रेलिया का यह एक्सपेरिमेंट सफल साबित नहीं हुआ है. 16 साल से कम उम्र के लगभग 85 प्रतिशत बच्चे अभी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूज कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वो किसी दूसरे की बजाय अपने अकाउंट से इन प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस कर रहे हैं. हालांकि, दो तिहाई टीनएजर्स ने कहा कि उन्हें एज वेरिफाई करनी पड़ी है. इसके लिए उनसे डेट ऑफ बर्थ या सेल्फी अपलोड करने को कहा जाता है. इसके बावजूद टीनएजर्स ने ऐसे जुगाड़ निकाल लिए हैं, जिससे बैन का असर नहीं हो रहा. सर्वे में शामिल कई टीनएजर्स ने कहा कि उन्होंने फेक अकाउंट क्रिएट कर लिए हैं और कई प्राइवेट ब्राउजिंग के जरिए बैन से बच रहे हैं.
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