सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद झुंझलाए ट्रंप ने लिया यू-टर्न, कर दिया 10 परसेंट ग्लोबल टैरिफ का ऐलान

सतीश कुमार
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Trump Tariff: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रंप के टैरिफ को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया है. 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि संविधान के तहत टैरिफ या टैक्स लगाने का अधिकार सिर्फ संसद को है. राष्ट्रपति मनमाने ढंग से टैरिफ नहीं लगा सकते. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का सुनाया गया यह फैसला कई लोगों के लिए राहत की बात है, जिनसे ट्रंप ने अब तक अरबों डॉलर के टैरिफ वसूले. 

क्या है IEEPA? 

ट्रंप ने अप्रैल 2025 से 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत दुनिया भर के तमाम देशों पर भारी-भरकम टैरिफ थोपे. यह एक्ट अमेरिका के लिए एक ऐसा ‘इकोनॉमिक हथियार’ है, जिसका इस्तेमाल कर वह बिना जंग लड़े किसी भी देश की आर्थिक कमर तोड़ सकता है.

इसके तहत अगर राष्ट्रपति को लगता है कि किसी देश से अमेरिका की सुरक्षा या उसकी इकोनॉमी के लिए खतरा है, तो वह इमरजेंसी का इस्तेमाल कर इस कानून का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके जरिए किसी देश के कारोबार, लेनदेन पर रोक लगाई जा सकती है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति इस कानून का इस्तेमाल कर किसी देश पर मनमाने ढंग से टैरिफ नहीं बढ़ा सकते, उन्हें सिर्फ लेनदेन रोकने का अधिकार है. 

ट्रंप ने किया 10 परसेंट ग्लोबल टैरिफ का ऐलान 

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का ट्रंप ने जमकर आलोचना की. हालांकि, इस फैसले के कुछ ही देर बाद ट्रंप ने दुनियाभर पर 10 परसेंट ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के हवाले से BBC ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ट्रंप के लिए नए फैसले के साथ अब भारत, यूरोपीय यूनियन जैसे अमेरिका के साथ ट्रेड डील करने वाले दुनिया के तमाम देशों पर अब धारा 122 के तहत ग्लोबल टैरिफ लगाया जाएगा. इससे साफ है कि आगे आने वाले समय में भारत पर लगाया गया 18  परसेंट का टैरिफ 10 परसेंट में तब्दील हो जाएगा.    

टैरिफ के नाम अब तक वसूले गए पैसों का क्या?  

हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल आता है कि कंजर्वेटिव-मैजोरिटी कोर्ट के फैसले के बाद क्या ट्रंप अब तक वसूले गए टैरिफ को रिफंड करेंगे? कोर्ट के फैसले के बाद अब ट्रंप के पहले लगाए गए टैरिफ को गैर-कानूनी माना जा रहा है. ट्रंप ने टैरिफ रेवेन्यू से 175 अरब डॉलर कमाए. कोर्ट ने रिफंड के मुद्दे पर तो बात नहीं की, लेकिन जानकारों का कहना है कि आने वाले महीनों में निचली अदालतें इस पर फैसला करेंगी.

अमेरिका में बड़ी कंपनियों के लिए बैंकिंग का काम देखने वाली संस्था ING के एनालिस्ट कार्स्टन ब्रेज्स्की और जूलियन गीब ने कहा कि US कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड से इसके प्रोसेस होने की उम्मीद है. उनका कहना है कि रिफंड का पैसा अपने आप नहीं आएगा. अगर कोई इम्पोर्टर अपना पैसा वापस चाहता है, तो उन्हें अपना अलग से केस फाइल करना होगा. हालांकि, यह प्रॉसेस भी अब शुरू हो चुका है. इस कानूनी लड़ाई में 1,000 से ज्यादा कंपनियां शामिल हैं. कोर्ट के इस फैसले से अमेरिकी सरकार को अरबों डॉलर के रिफंड क्लेम का सामना करना पड़ सकता है. 

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.