हैंडल से हाथ हटाए तो रुक जाएगी बाइक! रोड एक्सिडेंट रोकने को अब सरकार लेगी तकनीक का सहारा

नई दिल्ली. दोपहिया वाहन चालकों द्वारा लापरवाही से ड्राइविंग करने के कारण देश में हर साल बड़ी संख्‍या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं. सड़क पर स्‍टंट करने और स्‍कूटर या बाइक चलाते वक्‍त मोबाइल का इस्‍तेमाल करना रोड एक्‍सीडेंट का मुख्‍य कारण हैं. जुर्माना और ट्रैफिक पुलिस की सख्‍ती भी इन गैर-जिम्‍मेदाराना हरकतों पर अभी तक लगाम नहीं लगा पाए हैं. यही वजह है कि अब सरकार इस समस्‍या का ‘तकनीकी समाधान’ खोजने पर जोर दे रही है.

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार चाहती है कि कंपनियां दोपहिया वाहनों के दोनों हैंडलबार पर टच या प्रेशर सेंसर लगाए. इन सेंसरों का काम यह जांचना होगा कि चालक के दोनों हाथ हैंडल पर हैं या नहीं. यदि राइडर के हाथ 7-8 सेकंड से ज्यादा समय तक हैंडल से हटे रहते हैं तो बाइक की गति अपने आप ही धीमी हो जाए. ऐसा होने पर राइडर को मजबूरी में सही तरीके से हैंडल पकड़कर वाहन चलाता होगा.

इन आंकड़ों ने सरकार को डाला चिंता में

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि दोपहिया वाहनों से होने वाली दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. 2021 में दोपहिया चालकों की मौतों की संख्या 69,385 थी, जो 2023 में बढ़कर 77,539 हो गई. यह देश में कुल सड़क दुर्घटना मौतों का लगभग 45 फीसदी है. सड़क परिवहन मंत्रालय का कहना है कि दोपहिया चालक न सिर्फ सड़क हादसों के सबसे बड़े पीड़ित हैं बल्कि कई मामलों में सबसे बड़े कारण भी हैं. 2023 में दोपहिया चालकों द्वारा की गई लापरवाह ड्राइविंग की वजह से ही 48,181 लोगों की जान गई.

इंडस्‍ट्री के साथ जारी है विचार-विमर्श

सूत्रों के अनुसार, परिवहन मंत्रालय बाइक के हेंडिल पर सेंसर लगाने को लेकर वाहन निर्माता कंपनियों के साथ बैठक कर चुकी है. अधिकारियों का मानना है कि अगर वाहन खुद असुरक्षित ड्राइविंग का पता लगाकर तुरंत प्रतिक्रिया दे, तो सड़क पर जोखिम भरा व्यवहार काफी कम हो सकता है. मोबाइल चलाते हुए ड्राइविंग देश में गंभीर समस्या बन चुकी है, खासकर युवाओं में एक हाथ से बाइक चलाने का चलन तेजी से बढ़ा है. ऐसे में यह तकनीक दुर्घटनाओं को कम करने में बेहद प्रभावी साबित हो सकती है.

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