12वीं बोर्ड परीक्षा कॉपियों की जांच अब फिजिकल नहीं, डिजिटल तरीके से होगी

सतीश कुमार
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई इस साल से कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा की कॉपियों की जांच के तरीके में बड़ा बदलाव करने जा रहा है. अब तक जहां उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कागज पर की जाती थी, वहीं अब इसकी जगह ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया जा सकता है. इस नई व्यवस्था के तहत कॉपियों को स्कैन कर कंप्यूटर की स्क्रीन पर जांचा जाएगा. बोर्ड का मानना है कि इससे जांच प्रक्रिया ज्यादा साफ, तेज और भरोसेमंद बनेगी.

ऑन स्क्रीन मार्किंग का मतलब है कि छात्रों की आंसर शीट को स्कैन करके डिजिटल रूप में परीक्षकों को दी जाएगी. शिक्षक कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन पर ही उत्तर देखेंगे और वहीं अंक देंगे. इसके लिए सीबीएसई एक तय और सख्त मार्किंग स्कीम लागू करेगा, ताकि हर छात्र को बराबरी का मूल्यांकन मिल सके. इस सिस्टम के लिए एक खास एजेंसी का चयन भी किया जा रहा है, जो तकनीकी काम संभालेगी.

स्टेप मार्किंग से छात्रों को मिलेगा पूरा फायदा

इस नई जांच प्रणाली में सीबीएसई की मार्किंग स्कीम का सख्ती से पालन होगा. शिक्षक सही स्टेप्स और जरूरी शब्दों के आधार पर अंक देंगे. इससे उन छात्रों को फायदा मिलेगा, जो सवाल का पूरा हल लिखते हैं, भले ही अंतिम जवाब थोड़ा अलग हो. बोर्ड का कहना है कि इससे गलतियों की संभावना कम होगी और छात्रों को उनके सही प्रयास का पूरा श्रेय मिलेगा.

समय की बचत और गलतियों में कमी

सीबीएसई का मानना है कि डिजिटल जांच से काफी समय बचेगा. फिजिकल कॉपियों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने की जरूरत नहीं होगी. जांच का काम तेजी से पूरा होगा और रिजल्ट भी जल्दी घोषित किए जा सकेंगे. साथ ही, मैनुअल जांच में होने वाली मानवीय गलतियां भी काफी हद तक कम होंगी. पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड में रहेगी, जिससे पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़ेंगे.

क्रॉस-चेकिंग और मॉडरेशन होगी ज्यादा तेज

ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में क्रॉस-चेकिंग और मॉडरेशन की प्रक्रिया भी आसान और तेज हो जाएगी. जरूरत पड़ने पर किसी कॉपी को दोबारा जांचने या दूसरे परीक्षक को दिखाने में समय नहीं लगेगा. सब कुछ डिजिटल होने से बोर्ड आसानी से यह देख सकेगा कि कहीं किसी छात्र के साथ अन्याय तो नहीं हुआ. इससे एक ही जवाब पर अलग-अलग अंक मिलने की समस्या भी काफी हद तक खत्म होगी.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़ा फैसला

सीबीएसई का यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप माना जा रहा है. नई शिक्षा नीति का मकसद है कि छात्र रटने के बजाय समझकर पढ़ें और लिखें. जब जांच साफ और तय नियमों के तहत होगी, तो छात्रों का ध्यान भी सही तरीके से पढ़ाई पर जाएगा. बोर्ड का कहना है कि यह सिस्टम शिक्षा में बराबरी और गुणवत्ता लाने में मदद करेगा.

आगे कक्षा 10वीं में भी हो सकता है लागू

सीबीएसई ने साफ किया है कि अगर कक्षा 12वीं में ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम सफल रहता है, तो अगले साल से इसे कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में भी लागू किया जा सकता है. इससे पूरे बोर्ड सिस्टम में एक जैसी और आधुनिक जांच प्रक्रिया अपनाई जा सकेगी.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.
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