Nasscom President on AI Concerns: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर आईटी सेक्टर में इस समय गहन बहस चल रही है. पिछले साल 2025 में Microsoft, Infosys और Google जैसी बड़ी टेक कंपनियों में हुई छंटनी के बाद यह आशंका और गहरी हो गई कि क्या एआई आने वाले समय में आईटी नौकरियों को पूरी तरह से बदल देगा. कंपनियों ने छंटनी के पीछे एआई में बढ़ते निवेश और भविष्य की रणनीतिक पुनर्गठन को वजह बताया, जिससे कर्मचारियों की चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ी है. आंकड़े बताते हैं कि 2025 से अब तक आईटी कंपनियों के मार्केट वैल्यू में 50 बिलियन डॉलर से अधिक की गिरावट आ चुकी है.
हालांकि, उद्योग संगठन NASSCOM के अध्यक्ष राजेश नाम्बियार इन आशंकाओं को बेबुनियाद मानते हैं. उनका कहना है कि एआई टेक्नोलॉजी सर्विसेज से जुड़ी नौकरियों को खत्म नहीं करेगा, बल्कि काम करने के तरीके को बदलेगा. उनके अनुसार, बड़े एंटरप्राइजेज और जटिल तकनीकी सिस्टम को लागू करने, प्रबंधित करने और रेगुलेटरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आईटी सर्विसेज की भूमिका पहले की तरह जरूरी बनी रहेगी.
क्यों एआई से नहीं डरने की जरूरत?
इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में नामबियार ने कहा कि क्लाउड, ऑटोमेशन या एआई आधारित टूल्स को लेकर जो डर फैलाया जा रहा है कि वे पारंपरिक आईटी नौकरियों को खत्म कर देंगे, वह पूरी तरह निराधार है.
भले ही कुछ विश्लेषकों का मानना है कि एआई टूल्स जैसे Anthropic के कोवर्क या Palantir Technologies जैसे प्लेटफॉर्म्स के चलते आने वाले वर्षों में आईटी सर्विसेज की आय में लगभग 2 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है, लेकिन नामबियार का विश्वास है कि लगभग 283 बिलियन डॉलर की भारतीय आईटी इंडस्ट्री इस बदलाव को सफलतापूर्वक आत्मसात कर लेगी.
क्या बोले नैस्कॉम प्रसिडेंट?
उद्योग नेतृत्व का मानना है कि एआई नौकरी खत्म करने के बजाय स्किल्स में बदलाव लाएगा. यानी चुनौती नौकरियों के अस्तित्व की नहीं, बल्कि कर्मचारियों के कौशल उन्नयन और नई तकनीकों के अनुरूप खुद को ढालने की है.
NASSCOM के अध्यक्ष राजेश नाम्बियार ने एच1बी वीजा इंटरव्यू को लेकर उठ रही चिंताओं पर संतुलित और आशावादी रुख अपनाया है. उनका कहना है कि भारतीय आईटी कंपनियों के पास अमेरिका में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त प्रतिभा और परिचालन क्षमता मौजूद है, जिससे वे वहां की परियोजनाओं और ग्राहकों की जरूरतों को पूरा कर सकती हैं. यानी वीजा से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद कंपनियों के कामकाज पर बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना कम है.
उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक डिलीवरी मॉडल अब पहले से ज्यादा विविध और स्थानीयकृत हो चुका है. कई भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिका में स्थानीय नियुक्तियों और ऑनशोर क्षमताओं को मजबूत कर चुकी हैं, जिससे एच1बी वीजा पर निर्भरता पहले की तुलना में कम हुई है.
गौरतलब है कि फरवरी में आयोजित होने वाले ‘टेक्नोलॉजी एंड लीडरशिप फोरम’ से पहले नैस्कॉम अपनी वार्षिक रणनीतिक समीक्षा तैयार कर रहा है. इस मंच पर उद्योग जगत के दिग्गज एकत्र होंगे और एआई, वैश्विक टैलेंट मोबिलिटी, वीजा नीतियां और आईटी सेक्टर की भविष्य की दिशा जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी.

