20s में भी कपल्स में क्यों हो रही फर्टिलिटी की प्रॉब्लम, एक्सपर्ट्स से जानें

aditisingh
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एक समय था जब इनफर्टिलिटी या कंसीव करने में दिक्कत को 30 या 35 की उम्र के बाद की समस्या माना जाता था. हालांकि, अब यह तस्वीर भी बदल रही है, डॉक्टरों के क्लीनिक में अब 23 से 29 साल के युवा कपल्स भी कंसीव न कर पाने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. यह बदलाव मेडिकल एक्सपर्ट्स के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है. क्योंकि 20 से 30 साल की उम्र को अब तक फर्टिलिटी के लिहाज से सबसे बेहतर माना जाता रहा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में हर 6 में से एक व्यक्ति जीवन में कभी न कभी इनफर्टिलिटी का सामना करता है. यह आंकड़ा बताता है की समस्या अब सिर्फ बढ़ती उम्र तक सीमित नहीं रही है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि 20s में भी कपल्स को इनफर्टिलिटी की प्रॉब्लम क्यों हो रही है और एक्सपर्ट इसे लेकर क्या कहते हैं. 

लाइफस्टाइल बन रहा बड़ा कारण 

फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि बढ़ती बदलती लाइफस्टाइल इनफर्टिलिटी का सबसे बड़ा कारण है. देर रात तक जागना, नींद पूरी न होना, जंक फूड का ज्यादा सेवन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और बढ़ता मोटापा हार्मोनल संतुलन बिगड़ रहे हैं. इसे लेकर एक्सपर्ट कहते हैं कि पहले फर्टिलिटी की समस्या ज्यादातर उम्र से जुड़ी होती थी, लेकिन अब 20s की महिलाएं भी कंसीव करने में दिक्कत महसूस कर रही है. वहीं कई युवा यह मानकर चलते हैं कि वह बहुत छोटे हैं, इसलिए समय पर जांच नहीं कराते हैं. इसके अलावा एक्सपर्ट्स बताते हैं कि लगातार अनहेल्दी रूटीन से महिलाओं में ओवुलेशन अनियमित हो जाता है और पुरुषों में स्पर्म काउंट और क्वालिटी पर भी असर पड़ता है. 

पुरुष भी हो रहे प्रभावित 

इनफर्टिलिटी सिर्फ महिलाओं की समस्या नहीं रही है. डॉक्टर के अनुसार पुरुषों में लो स्पर्म काउंट, स्पर्म की कम मूवमेंट और हार्मोनल असंतुलन तेजी से बढ़ रहे हैं. वहीं स्मोकिंग, शराब पीना, मोटापा और लंबे समय तक लैपटॉप गोद में रखकर काम करना स्पर्म हेल्थ को प्रभावित कर सकता है कुछ रिसर्च में यह भी सामने आया है कि लंबे समय तक डिवाइस के इस्तेमाल और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन से स्पर्म क्वालिटी पर असर पड़ सकता है. 

महिलाओं में बढ़ रही नॉर्मल हार्मोनल दिक्कतें 

कम उम्र में पीसीओएस, थायराइड, एंडोमेट्रियोसिस और पेल्विक इन्फेक्शन जैसी समस्याएं सामने आ रही है. कहीं महिलाओं में एग क्वालिटी भी उम्मीद से कमजोर पाई जा रही है. वहीं बायोलॉजिकली हर महिला सीमित संख्या में ओवेरियन रिजर्व के साथ पैदा होती है, जो समय के साथ घटते जाते हैं. लेकिन खराब लाइफस्टाइल और एनवायरमेंट इस गिरावट को तेज कर रहे हैं. इसका असर यह होता है कि फर्टिलिटी की समस्या 30 से पहले ही दिखने लगती है. इसके अलावा एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इनफर्टिलिटी में स्ट्रेस भी बड़ा फैक्टर माना जाता है. दरअसल करियर का दबाव, आर्थिक चिंता और सोशल लाइफ से जुड़ा स्ट्रेस शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ा सकता है. इससे प्रजनन हार्मोन प्रभावित होते हैं. महिलाओं में पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का लेवल गिर सकता है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि फर्टिलिटी ओवर ऑल हेल्थ का आईना होती है, ऐसे में आप क्या खाते हैं, कितनी नींद लेते हैं और कितना तनाव जलते हैं यह सीधे प्रजनन क्षमता से जुड़ा है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.