5 स्‍टार रेटिंग हासिल करने को कारों को देनी होगी ‘कड़ी परीक्षा’, 3 नहीं होंगे 5 क्रैश टेस्ट

नई दिल्ली. भारत में कारों की सुरक्षा रेटिंग अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त होने वाली है. कारों की मजबूती और सुरक्षा को अब बहुत ज्यादा विस्तार से परखा जाएगा. सड़क परिवहन मंत्रालय ने भारत एनकैप (Bharat NCAP) के अगले चरण BNCAP 2.0 का ड्राफ्ट जारी किया है. नए नियम अक्टूबर 2027 से लागू होंगे. नई व्यवस्था के तहत कार कंपनियों के लिए फाइव-स्टार सेफ्टी रेटिंग हासिल करने के लिए तीन की बजाय पांच अलग-अलग क्रैश टेस्ट से गुजरना होगा. फिलहाल भारत एनसीएपी के के तहत ऑफसेट फ्रंटल, साइड और साइड-पोल इम्पैक्ट टेस्ट होते हैं. लेकिन नए प्रोटोकॉल में दो और टेस्ट फुल फ्रंटल क्रैश टेस्ट और रियर क्रैश टेस्ट भी जोड़ दिए गए हैं.

सड़क परिवहन मंत्रालय ने ने ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड कोड 197 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है और सुझाव मांगे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव भारतीय कारों की सुरक्षा को बेहतर बनाएगा. NCAP का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क दुर्घटना के दौरान कारें यात्रियों की जिंदगी बचाने में सक्षम हों, न कि खतरा बन जाएं. यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब केवल दुर्घटना में कार कैसी रहती है, इसकी बजाय यह भी देखा जाएगा कि कार दुर्घटना होने नहीं दे, इसके लिए उसमें कौन-कौन सी तकनीक मौजूद है.

ये टेस्‍ट होंगे पास तो ही मिलेगी 5 स्‍टार रेटिंग

नई रेटिंग प्रणाली कारों को पांच व्यापक सुरक्षा मानकों पर परखेगी-

  • सुरक्षित ड्राइविंग क्षमता
  • दुर्घटना से बचाव
  • दुर्घटना के दौरान सुरक्षा (क्रैश प्रोटेक्शन)
  • पैदल यात्रियों और दोपहिया चालकों की सुरक्षा
  • दुर्घटना के बाद यात्रियों की सुरक्षा

इसमें ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB), इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC), ड्रॉज़िनेस डिटेक्शन, लेन डिपार्चर वार्निंग और फॉरवर्ड कोलिजन अलर्ट जैसे फीचर शामिल हैं. इनके आधार पर गाड़ियों को बेहतर रेटिंग मिलेगी.

महिला और बच्चों की सुरक्षा पर भी जोर

नए प्रोटोकॉल का एक बड़ा बदलाव यह है कि अब महिला यात्रियों की सुरक्षा का अलग मूल्यांकन किया जाएगा, जो वर्तमान नियमों में शामिल नहीं है. साथ ही 6 और 10 साल के बच्चों के लिए भी सुरक्षा रेटिंग दी जाएगी. इसके लिए उन्नत प्रकार की क्रैश टेस्ट डमीज़ का उपयोग किया जाएगा, जिससे वास्तविक परिस्थितियों में होने वाले प्रभाव का बेहतर आकलन हो सकेगा.

ईवी और पेट्रोल-डीजल कारों के लिए नई गाइडलाइन

नए नियमों में दुर्घटना के बाद की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों में आग या बिजली के झटके का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए ऊर्जा प्रबंधन, बैटरी सुरक्षा और यात्रियों को बाहर निकालने की प्रक्रिया का परीक्षण अनिवार्य होगा. इसके अलावा मल्टी-कोलिजन ब्रेकिंग, एसओएस या ई-काल सुविधा और हैज़र्ड वार्निंग सिस्टम जैसे फीचर्स का भी मूल्यांकन वैकल्पिक रूप से किया जाएगा.