8वें वेतन आयोग पर हलचल तेज, फिटमेंट फैक्टर और इंक्रीमेंट को लेकर कर्मचारी संगठनों की ये है मांग; जानें डिटेल

सतीश कुमार
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8th pay Commission Fitment Factor Demand: 8वें वेतन आयोग का इंतजार केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स बेसब्री से कर रहे हैं. लाखों कर्मचारियों की उम्मीद केंद्र सरकार पर बनी हुई है, कि सरकार कब नई घोषणा करेंगी. आठवें वेतन आयोग को लेकर सरकार ने संगठनों और कर्मचारियों से उनकी राय मांगी है. समय-समय पर संगठनों की ओर से अपने सुझाव सरकार को भेजे जा रहे हैं.

आज, यानी 25 फरवरी को दिल्ली में नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी यानी नेशनल काउंसिल की बैठक भी होने वाली है. जिससे आठवें वेतन आयोग को लेकर मांगो पर चर्चा होगी और इसे अंतिम रूप देने का प्रयास किया जाएगा. आइए जानते हैं, कर्मचारी संगठन सरकार से कौन-कौन सी मांगे कर रहे हैं?

फिटमेंट फैक्टर और वेतन बढ़ोतरी पर कर्मचारियों की नजर

आगामी वेतन से जुड़ी चर्चाओं में 3.25 फिटमेंट फैक्टर और 7 प्रतिशत वार्षिक इंक्रीमेंट का मुद्दा सबसे प्रमुख बनकर सामने आया है. कर्मचारियों का मानना है कि यदि इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो बेसिक सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है. उनका कहना है कि इससे वेतन ढांचा अधिक संतुलित बनेगा. साथ ही मौजूदा हालात में बढ़ती महंगाई से कर्मचारियों को राहत मिल सकेगी.

आज की बैठक में ड्राफ्टिंग कमेटी विभिन्न कर्मचारी संगठनों से सुझाव जुटाकर एक साझा ज्ञापन तैयार करेगी. कमेटी का उद्देश्य सभी मांगो को व्यवस्थित तरीके से सरकार तक पहुंचाना है. यह संयुक्त ज्ञापन 8वें वेतन आयोग की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई को सौंपा जाएगा. मिली जानकारी के अनुसार, ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने से पहले करीब एक सप्ताह तक विचार-विमर्श किया जाएगा, ताकि कोई अहम मुद्दा छूट न जाए.

इंक्रीमेंट में बढ़ोतरी की प्रमुख मांग

केंद्रीय कर्मचारी महासंघ के प्रतिनिधियों का मानना है कि, सरकार को सालाना इंक्रीमेंट पर विचार करना चाहिए. अभी हर साल 3 प्रतिशत की वार्षिक बढ़ोतरी होती है. संगठन की मांग है कि, इसे 7 प्रतिशत किया जाए या फिर साल में दो बार इंक्रीमेंट का लाभ कर्मचारियों को मिले.

रिटायरमेंट से जुड़ी मांग

कर्मचारी संगठनों ने लीव एन्कैशमेंट सीमा को 300 दिन से बढ़ाकर 400 दिन करने की मांग उठाई है. ताकि लंबी सेवा देने वालों को ज्यादा लाभ मिल सके. वहीं जहां केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (CGHS) उपलब्ध नहीं है.

वहां फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस 1,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह करने का सुझाव दिया गया है. संगठन का मानना है कि मौजूदा समय में मिलने वाली रकम इलाज के खर्च के मुकाबले बहुत कम है.     

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.