रायबरेली। जिले के करीब 22 हजार निजी नलकूपों को स्वतंत्र फीडर से बिजली देने की मंशा परवान नहीं चढ़ सकी है। इससे इस गर्मी में भी जिले के पांच लाख बिजली उपभोक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ेगी। नलकूपों को अलग से आपूर्ति के लिए पहले चरण में 28 फीडर बनकर तैयार हो गए हैं, लेकिन इनमें अभी तक करंट नहीं दौड़ा है। जिले में करीब पांच लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं को 54 विद्युत उपकेंद्रों से बिजली आपूर्ति होती है। गर्मी में नलकूप चलने से लोड इतना बढ़ जाता है कि उपभोक्ताओं को लोवोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या से जूझना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए 22 हजार निजी नलकूपों बिजली देने के लिए अलग से फीडर बनाए जा रहे हैं। इनमें 28 फीडर बनकर तैयार हो गए हैं, जबकि 44 फीडरों को बनाने का काम चल रहा है।
जो फीडर बन गए हैं, उनमें बिजली नहीं दौड़ी। सलोन, छतोह, डीह, सूची में नलकूप के फीडर चालू करने की कोशिश की गई, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते शुरू नहीं हो पाए। इससे पुरानी लाइनों से ही इन्हें बिजली मिल रही है। जर्जर तारों की वजह से आए दिन फॉल्ट बना रहता है। गर्मी में सभी फीडर ओवरलोड हो जाते हैं। ऐसे में किसानों के नलकूप क्षमता से नहीं चल पाते। वहीं फॉल्ट के चलते घरेलू, कामर्शियल उपभोक्ताओं को बिजली संकट से जूझना पड़ता है।
जल्द शुरू कराई जाएगी फीडरों से बिजली
नलकूप उपभोक्ताओं के लिए जो फीडर बनकर तैयार हो गए हैं, उनसे बिजली आपूर्ति शुरू कराने की तैयारी चल रही है। निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि शेष फीडराें का काम भी जल्दी पूरा कराया जाए, ताकि किसानों को स्वतंत्र फीडर से बिजली मिल सके।
रामकुमार, मुख्य अभियंता पावर कॉर्पोरेशन रायबरेली जोन

