Amethi News। मुंशीगंज पुलिस ने केले की आड़ में बोरों में भरकर दुर्लभ प्रजाति के कछुओं की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने बुधवार रात वाहन चेकिंग के दौरान पिकअप से 1203 कछुए बरामद करते हुए तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है। बरामद कछुए संरक्षित श्रेणी के हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 30 लाख रुपये बताई जा रही है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर तीनों तस्करों को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया है। न्यायालय से अनुमति मिलने पर कछुओं को नदी में प्रवाहित किया जाएगा।
इंस्पेक्टर शिवाकांत त्रिपाठी के अनुसार, मुखबिर से कछुओं की तस्करी की सूचना मिलने पर मुसाफिरखाना-अमेठी मार्ग पर इंजीनियरिंग कॉलेज के पास घेराबंदी कर चेकिंग शुरू की गई। इसी दौरान पिकअप को रोकने का इशारा किया गया तो चालक वाहन लेकर भागने लगा। हालांकि, पुलिस ने पीछा कर उसे पकड़ लिया। तलाशी के दौरान पिकअप में ऊपर केले लदे मिले, लेकिन नीचे बोरों में कछुए भरे हुए थे। पुलिस ने मौके से जगदीशपुर के पालपुर गांव निवासी रमेश और राजेश, श्रावस्ती के वीरेंद्र विक्रम को हिरासत में लिया। पूछताछ में तीनों ने बताया कि कछुए पालपुर गांव से वाहन पर लोड किए गए थे। इन्हें वाराणसी होते हुए कोलकाता पहुंचाना था।
वन दरोगा सुरेंद्र कुमार व उनकी टीम की मौजूदगी में पिकअप से 60 बोरे उतारे गए, जिनमें 1203 दुर्लभ प्रजाति के कछुए मिले। वन अधिकारियों के अनुसार, कछुओं का कुल वजन करीब 15 क्विंटल है। तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से 60 हजार रुपये भी बरामद किए गए। पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी रमेश के खिलाफ पहले से भी कछुआ तस्करी के कई मामले दर्ज हैं। प्रभागीय वनाधिकारी रणवीर मिश्रा ने बताया कि बरामद कछुए संरक्षित श्रेणी में आते हैं। न्यायालय से अनुमति मिलने पर कछुओं को गोमती नदी में प्रवाहित किया जाएगा।
पालपुर गांव से चल रहा कछुआ तस्करी का नेटवर्क
जगदीशपुर के पालपुर गांव को कछुआ तस्करी का गढ़ माना जाता है। यहां के तस्कर अमेठी, रायबरेली, बाराबंकी, सुल्तानपुर और अयोध्या के गांवों व तालाबों से कछुए एकत्र करते हैं। बाद में इन्हें ट्रेन या अन्य माध्यमों से कोलकाता भेजा जाता है। ट्रेनों पर निगरानी बढ़ने के कारण इस बार तस्करी सड़क मार्ग से की जा रही थी। पालपुर में एक बिरादरी के लोग लंबे समय से इस अवैध धंधे में शामिल हैं। गिरोह में करीब 20 पुरुष व महिलाएं सक्रिय हैं। वर्ष 2017 में एसटीएफ ने यहां से 9000 कछुए बरामद किए थे। इसके बाद भी कई बार तस्कर पकड़े जा चुके, लेकिन तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। इसको लेकर स्थानीय पुलिस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
