India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय ट्रेड डील को लेकर बड़ी प्रगति के संकेत मिले हैं. अगले चार से पांच दिनों के भीतर दोनों देशों की ओर से इस समझौते पर एक संयुक्त बयान जारी किए जाने की उम्मीद है. गुरुवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील का पहला चरण लगभग तैयार हो चुका है.
पीयूष गोयल के मुताबिक, नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच व्यापार वार्ता धीरे-धीरे आगे बढ़ी है और अब यह डील दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है. हालांकि, पहले चरण में किन-किन बिंदुओं को शामिल किया जाएगा, इसका विस्तृत ब्यौरा फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया गया है.
वर्चुअली होंगे दस्तखत, औपचारिक मुहर में लगेगा वक्त
वाणिज्य मंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच ज्वाइंट एग्रीमेंट पर वर्चुअल तरीके से दस्तखत किए जाएंगे. इसके बाद इस समझौते को औपचारिक रूप से लागू करने में करीब 30 से 45 दिनों का समय लग सकता है. हालांकि, भारत को इससे पहले ही कुछ रियायती लेटर मिलना शुरू हो जाएंगे, जिससे व्यापार को तुरंत राहत मिल सकेगी.
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत चाहता है कि यह समझौता जितनी जल्दी हो सके लागू हो, ताकि उसके बाद भारत को टैरिफ और अन्य व्यापारिक शर्तों में ज्यादा छूट मिलनी शुरू हो जाए. भारत-अमेरिका व्यापार का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि सिर्फ विमानों की मांग और ऑर्डर ही करीब 70 से 80 बिलियन डॉलर के अनुमानित हैं, जिससे अमेरिका से भारत की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है.
5 साल में 2 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार अनुमान
इकोनॉमिक टाइम्स ने मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया है कि अगले पांच वर्षों में भारत-अमेरिका के बीच कुल अनुमानित खरीद करीब 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. इसमें से मौजूदा व्यापार ढांचे के अनुसार अमेरिका की ओर से भारत को लगभग 500 बिलियन डॉलर की सप्लाई किए जाने का अनुमान है.
पीयूष गोयल ने यह भी साफ किया कि जैसे ही संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर हो जाएंगे, भारत पर लागू टैरिफ दरों में कटौती को कार्यकारी आदेश के जरिए तुरंत प्रभावी कर दिया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में व्यापारिक बाधाओं में भी राहत दी जा सकती है.
भारत-अमेरिका रिश्तों में मील का पत्थर
भारत और अमेरिका के बीच यह प्रस्तावित ट्रेड डील दोनों देशों के रिश्तों में मील का पत्थर मानी जा रही है. दोनों ही पक्ष अपने-अपने बाजारों का विस्तार करना चाहते हैं और आपसी वाणिज्यिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर यह समझौता तय समय पर लागू होता है, तो इसका असर न सिर्फ व्यापार बल्कि निवेश, सप्लाई चेन और रोजगार पर भी देखने को मिल सकता है.

