Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी का व्रत विजय पाने के लिए बहुत लाभदायी माना जाता है. इस साल विजया एकादशी 13 फरवरी 2026 को है. विजया एकादशी के दिन कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं और इन संयोगों में भगवान विष्णु का पूजन किया जाए तो शुभ फल की प्राप्ति होती है. इस दिन सिद्ध योग बन रहा है. विजया एकादशी का व्रत श्रीराम ने भी किया था. इस व्रत में कथा का पाठ करना आवश्यक होता है मान्यता है इसे श्रीहरि पूजन जल्द स्वीकार करते हैं.
श्रीराम ने क्यों रखा था विजया एकादशी व्रत
यह एकादशी जीत, सफलता और आत्मबल का प्रतीक मानी जाती है. यह व्रत आत्मशुद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करता है और पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है. धार्मिक शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि भगवान राम ने भी लंका विजय से पहले इस पावन एकादशी का व्रत किया था, जिसके बाद उन्हें विजय प्राप्त हुई. यही कारण है कि
विजया एकादशी पूजा मुहूर्त
फाल्गुन माह के कृष्ण पत्र की एकादशी 12 फरवरी 2026 को दोपहर 12.22 पर शुरू हो जाएगी और 13 फरवरी 2026 को दोपहर 2.25 पर इसका समापन होगा.
पूजा मुहूर्त – सुबह 06:48 – सुबह 9.41
विजया एकादशी कथा
पौराणिक कथा के अनुसार जब रावण सीता जी का हरण कर लंका ले गया था. तब श्रीराम ने हनुमान जी, सुग्रीव और वानर सेना सहित लंका की ओर प्रस्थान किया लेकिन उनके रास्ते का रोडा था विशाल समुद्र. इसे पार करना आसान नहीं था. ऐसे में श्रीराम ने वकदाल्भ्य मुनि से इसका उपाय जाना. तब मुनि श्री ने श्रीराम से कहा फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का उपवास करने से आप अवश्य ही समुद्र को पार कर लेंगे और युद्ध में भी आपकी विजय होगी.
श्रीराम ने कैसे किया व्रत
- हे मर्यादा पुरुषोत्तम! इस उपवास के लिये दशमी के दिन स्वर्ण, चाँदी, ताम्बे या मिट्टी का एक कलश बनायें. उस कलश को जल से भरकर तथा उस पर पञ्च पल्लव रखकर उसे वेदिका पर स्थापित करें.
- उस कलश के नीचे सतनजा अर्थात मिले हुये सात अनाज और ऊपर जौ रखें. उस पर भगवान विष्णु की स्वर्ण की प्रतिमा स्थापित करें.
- एकादशी के दिन स्नानादि से निवृत्त होकर धूप, दीप, नैवेद्य, नारियल आदि से भगवान श्रीहरि का पूजन करें. वह सारा दिन भक्तिपूर्वक कलश के सामने व्यतीत करें और रात को भी उसी तरह बैठे रहकर जागरण करें.
- द्वादशी के दिन नदी या तालाब के किनारे स्नान आदि से निवृत्त होकर वह कलश ब्राह्मण को दे दें. हे दशरथनन्दन! यदि आप इस व्रत को सेनापतियों के साथ करेंगे तो अवश्य ही विजयश्री आपका वरण करेगी.
- मुनि के वचन सुन तब श्रीरामचन्द्रजी ने विधिपूर्वक विजया एकादशी का व्रत किया और इसके प्रभाव से राक्षसों के ऊपर विजय प्राप्त की.

