RBI Repo Rate: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे 5.25% पर बरकरार रखा है. MPC का रुख न्यूट्रल बना हुआ है. समिति के सभी सदस्य ब्याज दरों में बदलाव के पक्ष में नहीं थे. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन बेहतर बना हुआ है और ग्रोथ की रफ्तार आगे भी कायम रहने की उम्मीद है.
ग्रोथ और महंगाई का अनुमान
FY26 GDP ग्रोथ अनुमान 7.3% से बढ़ाकर 7.4% किया गया
FY26 खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 2.0% से बढ़ाकर 2.1%
Q1 FY27 महंगाई 3.9% से बढ़कर 4.0%
Q2 FY27 महंगाई 4.0% से बढ़कर 4.2%
RBI ने बताया कि नई GDP और महंगाई डेटा सीरीज़ के कारण FY27 के GDP अनुमान को फिलहाल टाल दिया गया है. FY27 के ग्रोथ और महंगाई के अनुमान अब अप्रैल की द्वैमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में जारी किए जाएंगे.
रुपये में मजबूती
RBI नीति से पहले सकारात्मक निवेशक भावनाओं के चलते शुरुआती कारोबार में रुपया 11 पैसे मजबूत होकर 90.23 प्रति डॉलर पर पहुंच गया.
आगे की राह
RBI गवर्नर ने कहा कि निकट भविष्य में महंगाई और ग्रोथ आउटलुक संतुलित और सकारात्मक बना हुआ है। वहीं, संभावित ट्रेड डील्स से एक्सपोर्ट और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है. कुल मिलाकर, RBI ने ब्याज दरों को स्थिर रखते हुए आर्थिक स्थिरता और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने का संकेत दिया है.
गौरतलब है कि आरबीआई ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है, जब भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित ट्रेड डील पर आखिरकार सहमति बन गई है. इसके साथ ही अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने और निर्यात को बढ़ावा देने के मकसद से भारत ने हाल ही में ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर भी दस्तखत किए हैं. भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए करीब 8 प्रतिशत की निरंतर विकास दर को जरूरी माना जा रहा है.
हालांकि, दूसरी ओर रुपये में हालिया कमजोरी ने आरबीआई की चिंताएं जरूर बढ़ा दी हैं, क्योंकि कमजोर मुद्रा से आयात महंगा होने और महंगाई पर दबाव बढ़ने का जोखिम बना रहता है.
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