जब दो महान आध्यात्मिक धाराएं एक साथ मिलती हैं तो उसका उद्देश्य केवल जन-कल्याण होता है. हाल ही में धर्मनगरी वृंदावन में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैन आचार्य लोकेश ने प्रख्यात संत पूज्य प्रेमानंद जी महाराज से शिष्टाचार भेंट की. इस मुलाकात के दौरान दोनों संतों के बीच विश्व शांति और युवा पीढ़ी के भविष्य को लेकर गंभीर चर्चा हुई.
चर्चा के दौरान आचार्य लोकेश ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे लंबे संघर्ष पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने प्रेमानंद जी से आग्रह किया, “इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए किए जा रहे प्रयास सफल हों, इसके लिए आप प्रार्थना करें.”
इस पर प्रेमानंद जी महाराज ने बहुत ही मार्मिक उत्तर दिया. उन्होंने कहा, ”केवल नीतियों या समझौतों से शांति नहीं आ सकती. वास्तविक शांति तभी संभव है जब मनुष्य का मन शुद्ध हो.” उन्होंने जोर देकर कहा कि अध्यात्म ही वह मार्ग है जो दुनिया को युद्ध की विभीषिका से बचा सकता है.
युवाओं का आध्यात्मिक विकास
दोनों संतों ने इस बात पर चिंता जताई कि आज की युवा पीढ़ी को सही दिशा की आवश्यकता है. उन्होंने सुझाव दिया…
शांति शिक्षा: स्कूलों और कॉलेजों में ‘पीस एजुकेशन’ को अनिवार्य बनाया जाए.
नैतिक मूल्य: युवाओं को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और सेवा का पाठ पढ़ाया जाए.
आध्यात्मिक नेतृत्व: नई पीढ़ी के लिए विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम शुरू किए जाएं.
आचार्य लोकेश ने कहा कि अहिंसा केवल एक शब्द नहीं बल्कि जीने का तरीका है. वहीं, प्रेमानंद जी ने स्पष्ट किया कि जब व्यक्ति भीतर से शांत होगा, तभी समाज और विश्व में शांति आएगी. यह भेंट ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक तनाव और ध्रुवीकरण बढ़ रहा है. ऐसे में दोनों संतों का यह संवाद समाज में सद्भाव, करुणा और शांति को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरक पहल माना जा रहा है.

