Maruti Suzuki को फ्यूल नियम बदलाव से झटका, छोटी कारें प्रभावित

सतीश कुमार
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भारत सरकार ने आगामी फ्यूल एफिशियंसी स्टैंडर्ड के नियमों में छोटी कारों के लिए प्रस्तावित छूट को पूरी तरह रद्द कर दिया है. रॉयटर्स की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, पावर मंत्रालय ने CAFE-III (कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी फेज-3) के नवीनतम 41-पेज ड्राफ्ट में पेट्रोल कारों के लिए 909 किलोग्राम या उससे कम वजन वाली कारों की विशेष राहत को हटा दिया है.

ये फैसला टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा समेत अन्य वाहन निर्माताओं के विरोध के बाद लिया गया, जिन्होंने तर्क दिया था कि ये छूट केवल एक कंपनी (मारुति सुजुकी) को फायदा पहुंचाएगी. आइए, जानते हैं कि अब नया नियम कैसे काम करेगा और ये केवल मारुति सुजुकी को ही क्यों फायदा पहुंचा रहा था?

Maruti Suzuki को झटका!

मारुति सुजुकी भारत के छोटी कार बाजार में करीब 95% हिस्सेदारी रखती है. सितंबर 2025 के एक पुराने ड्राफ्ट में 909 किलोग्राम से कम वजन वाली पेट्रोल कारों को फ्यूल एफिशियंसी टार्गेट में अतिरिक्त राहत देने का प्रस्ताव था, क्योंकि इनमें एफिशियंसी सुधार की सीमित गुंजाइश बताई गई थी.

इस छूट को छोटी कारों (लंबाई 4 मीटर से कम, इंजन क्षमता 1200 सीसी तक) के लिए उचित ठहराया गया था. लेकिन टाटा, महिंद्रा, हुंडई और JSW MG मोटर जैसी कंपनियों ने इसे असमान बताया, क्योंकि इससे मारुति को अनुचित लाभ मिलता और EV अपनाने के राष्ट्रीय लक्ष्यों को नुकसान पहुंचता है.

नए नियम में क्या?

नए ड्राफ्ट में ये छूट हटाने के साथ अन्य पैरामीटरों को भी सख्त किया गया है. वजन-आधारित ओवर-कंपेंसेशन रोका जाएगा, ताकि हल्की और भारी कारों के बीच समान प्रतिस्पर्धा बनी रहे. परिवहन क्षेत्र भारत के कुल पेट्रोलियम खपत और CO₂ उत्सर्जन का बड़ा हिस्सा है.

नए नियम अप्रैल 2027 से लागू होंगे और 2032 तक चलेंगे. इनमें फ्लीट-औसत उत्सर्जन को काफी कम करने का लक्ष्य है. कुछ अनुमानों के मुताबिक 91.7 ग्राम CO₂/किमी तक इसे कम किया जाएगा. अनुपालन न करने पर प्रति कार 550 डॉलर तक जुर्माना लग सकता है.

EV और हाइब्रिड पर जोर

ये बदलाव सभी वाहन निर्माताओं पर इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों की बिक्री बढ़ाने का दबाव बढ़ाएगा. मारुति सुजुकी के लिए ये बड़ा झटका है, क्योंकि उनके कई एंट्री-लेवल मॉडल्स (जैसे Alto, Celerio) इस छूट पर निर्भर थीं. कंपनी पहले ही कह चुकी है कि बिना राहत के छोटी कारों का उत्पादन मुश्किल हो सकता है. वहीं, टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियां EV सेगमेंट में मजबूत हैं.

ये कदम भारत की हरित परिवहन नीति का हिस्सा है, जो 2030 तक EV अपनाने को तेज करने पर जोर दे रही है. हालांकि, इससे सस्ती छोटी कारों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, जो मिडिल क्लास के लिए सबसे बहतर विकल्प हैं. ऑटो इंडस्ट्री अब निवेश को EV, हाइब्रिड और उन्नत इंजन तकनीकों की ओर मोड़ रही है.



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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.