NASA on Aliens: क्या हम इस ब्रह्मांड में अकेले हैं या कहीं और भी जीवन फल-फूल रहा है यह सवाल दशकों से इंसानों की जिज्ञासा को जगाता रहा है. समय-समय पर एलियंस को लेकर तरह-तरह की अफवाहें सामने आती रहती हैं लेकिन अब तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है. ऐसे में जानना दिलचस्प हो जाता है कि इस पूरे मुद्दे पर NASA के वैज्ञानिक क्या कहते हैं.
एलियंस पर NASA का आधिकारिक नजरिया
NASA के वैज्ञानिक साफ तौर पर कहते हैं कि अब तक पृथ्वी के बाहर किसी भी तरह के जीवन की पक्की खोज नहीं हुई है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ब्रह्मांड में जीवन असंभव है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, अभी तक एलियंस के अस्तित्व से जुड़ा कोई ऐसा प्रमाण नहीं मिला है जिसे वैज्ञानिक रूप से सही माना जा सके.
पृथ्वी से बाहर जीवन की तलाश जारी
NASA लंबे समय से पृथ्वी के बाहर जीवन की खोज में जुटा हुआ है. मंगल ग्रह पर अब तक कई रोवर्स और लैंडर्स भेजे जा चुके हैं जिन्होंने उसकी सतह की गहराई से जांच की है. ऑर्बिटर्स ने मंगल की शानदार तस्वीरें भी भेजी हैं. हालांकि, वैज्ञानिक मानते हैं कि हमने मंगल का सिर्फ एक छोटा-सा हिस्सा ही खंगाला है और वह भी सौरमंडल के उन गिने-चुने पिंडों में से एक है जहां जीवन की संभावना देखी जाती है.
जीवन के अनुकूल ग्रह और चंद्रमा
वैज्ञानिकों के अनुसार, हमारे सौरमंडल में बृहस्पति और शनि के कुछ बर्फीले चंद्रमा ऐसे हैं जिनमें पानी की बर्फ, अमोनिया और मीथेन पाए जाते हैं. माना जाता है कि इन चंद्रमाओं की सतह के नीचे विशाल महासागर हो सकते हैं जहां जीवन पनपने की परिस्थितियां बन सकती हैं. इसके अलावा, दूसरे तारों के आसपास घूमने वाले नए-नए एक्सोप्लैनेट्स की खोज से यह समझ बढ़ रही है कि जीवन के लिए अनुकूल वातावरण कितने विविध हो सकते हैं.
जीवन की संभावना को मजबूत करते संकेत
2021 में लॉन्च किया गया जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप इस दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ है. इस टेलीस्कोप ने कुछ दूर के ग्रहों के वायुमंडल में ऐसे गैसों के संकेत देखे हैं जो पृथ्वी जैसे वातावरण की याद दिलाते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में और भी उन्नत टेलीस्कोप्स जीवन से जुड़े संकेतों, यहां तक कि प्रकाश संश्लेषण जैसी प्रक्रियाओं के सबूत भी पकड़ सकते हैं.
दूसरे ग्रहों पर जीवन की पहचान कैसे होगी?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, रोशनी इस खोज की सबसे बड़ी कुंजी है. जब किसी एक्सोप्लैनेट के वातावरण से गुजरने वाली रोशनी को अलग-अलग रंगों में बांटा जाता है तो उससे वहां मौजूद गैसों और रसायनों की पहचान की जा सकती है. इस तकनीक को ट्रांजिट स्पेक्ट्रोस्कोपी कहा जाता है. इसके जरिए उन तत्वों का पता लगाया जा सकता है जिनका संबंध जीवन से माना जाता है.

