महाशिवरात्रि: शिव और शक्ति के मिलन की दिव्य कथा, जानिए कैसे हुए शिव-पार्वती का मिलन?

सतीश कुमार
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तपसा हि शुद्ध्यन्ति देहा न संशयः भक्त्या तु लभ्यते देवः शंकरः शाश्वतः।

अर्थ- तपस्या से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं, भक्ति से आपको शाश्वत शंकर की प्राप्ति होती है.

महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर मंदिर रात पर दीयों के रोशनी में जगमगाते हैं, घंटियां गूंजती हैं. भक्त हाथ जोड़कर “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हैं. कई लोग इसे शिव और पार्वती की विवाह की रात कहते हैं, लेकिन इस भव्य उत्सव के पीछे बेहद ही शक्तिशाली कहानी छिपी है. यह मात्र साधारण विवाह नहीं है, बल्कि शिव और शक्ति के मिलन का दिव्य दिन है. 

सती को खोने के बाद शिव विरक्त की राह पर 

महान तपस्वी शिव संसार के स्वामी सती को खोने के बाद विरक्त हो गए थे. सती माता के जाने का दुख उन्हें अंतर्मुखी (introvert) बना दिया था. जिस वजह से वे गहरी साधना में लीन हो गए समाज से विरक्त होकर और फिर पार्वती मां आई.

मां पार्वती प्रेम की खोज में एक राजकुमारी के रूप में नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय संतुलन को बहाल करने के लिए दृढ़ संकल्पित आत्मा के रूप में. एक राजकुमारी जिसने एशो-आराम की जगह तपस्या का चुना. 

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राजसी परिवेश में जन्मीं पार्वती का मन शिव में 

जीवन में आने वाली परीक्षाएं आंतरिक शक्ति को जागृत करती हैं और सच्चे विश्वास को स्पष्ट करने काम करती है. पार्वती का जन्म हिमालय में राजा हिमवान और रानी मैना के घर हुआ था.

राजसी परिवेश होने के बाद भी उनका मन राख से सने उस योगी की ओर आकर्षित हुआ जो राज्य और आभूषणों से परे रहते थे. 

शिव को पाने के लिए कठिन तपस्या की

शिव पुराण के अनुसार, माता पार्वती ने शिव जी को प्राप्त करने के लिए बर्फीली हवाओं में ध्यान किया. उन्होंने अपना भोजन मात्र पत्तों तक सीमित कर दिया और आखिर में उन्हें भी त्याग दिया. वह शिव से अपने लिए बदलाव की अपेक्षा नहीं रखती थीं, बल्कि खुद को उनकी चेतना के स्तर तक उठा रही थीं.

इस कथा में पहला प्रमाण उनका ही था. उन्होंने साबित किया कि, दिव्य प्रेम को अनुशासन में रहकर अर्जित किया जा सकता है. 

एक देवता जिसने वेश बदलकर भक्ति की परीक्षा ली. जब पार्वती की तपस्या ने स्वर्ग को हिला दिया, तो शिव ने यह देखने का निश्चय किया कि उनका संकल्प दृढ़ मात्र है या आवेगपूर्ण?

शिव ने ऋषि का वेश धारण कर पार्वती की परीक्षा ली

कुमारसंभवम् के काव्यात्मक वर्णन के अनुसार, एक विचरणशील ऋषि के वेश में उनके समक्ष प्रकट हुए. उन्होंने शिव की कमियों को वर्णन किया. उन्होंने शिव को बेघर, राख से सना हुआ और आत्माओं से घिरा बताया. उन्होंने राजकुमारी से पूछा कि, आप ऐसे दूल्हे की इच्छा क्यों कर रही हैं? पार्वती ने बिना संकोच किए शांत मन से शिव का बचाव किया.

उन्होंने ऋषि के समक्ष शिव के ब्रह्मांडीय स्वरूप, उनके वैराग्य और उनकी सर्वोच्च चेतना का वर्णन किया.

सती ने समझाया शिव का स्वभाव

उन्हें शिव की छवि से प्रेम नहीं था, बल्कि उनके सत्य को सराया था. उस वक्त पार्वती ने सिद्ध किया कि, उनकी भक्ति कल्पना मात्र नहीं, बल्कि ज्ञान में समाहित है. एक ऐसा दुख जिसे प्रेम के लौटने से पहले दूर करना जरूरी था.

सती की मृत्यु के बाद शिव का एकांतवास कमजोरी नहीं, बल्कि गहन भाव था, लेकिन पार्वती को स्वीकार करने से पहले उन्हें अपने दुख से ऊपर उठना पड़ा. 

दुख में डूबे रहने के दौरान विवाह संभव नहीं था. इसका मतलब यह परीक्षा आंतरिक थी. शिव को एकांत से निकलकर संसार से जुड़ना पड़ा. जब उन्होंने पार्वती को स्वीकार किया तो यह उपचार का प्रतीक है. उनके पुत्र कार्तिकेय ने बाद में राक्षस तारकासुर को हराकर ब्रह्मांडीय व्यवस्था को पुनर्स्थापित किया. यह विवाह एक व्यापक दिव्य योजना का भाग था. 

राख से सने योगी से लेकर गृहस्थ तक शिव महायोगी हैं. वे श्मशान घाटों से लेकर ऊंचे हिमालयों तक ध्यान करते हैं. वे आभूषणों का त्याग करते हैं. परंपराओं से परे पार्वती जीवन, उर्वरता, गति और गर्माहट का प्रतीक मानी जाती है. 

विरक्त से गृहस्थ जीवन की यात्रा

स्कंद पुराण के अनुसार, शिव को आखिर में गृहस्थ जीवन अपनाना पड़ा. स्कंद पुराण में वर्णित है कि, कैसे उनकी विवाह में गणों, भूत-प्रेत को देखकर पार्वती के परिवार वाले डर गए थे. तपस्वी जीवन की उग्रता राजसी परंपरा के परिष्कार से टकराई.

शिव ने यह सिद्ध किया कि, पारलौकिकता और उत्तरदायित्व एक साथ विद्यमान हो सकते हैं. चेतना और ऊर्जा का मिलन दार्शनिक रूप से शक्ति के बिना शिव से जुड़ा है. शक्ति के बिना शिव भी प्रकट नहीं हो सकते हैं. महाशिवरात्रि न केवल उनकी विवाह से जुड़ी है, बल्कि लिंग पुराण में वर्णित प्रकाश के अनंत स्तंभ अहंकार की पराजय का भी प्रतीक था.

उनका विवाह लोगों को सिखाता है कि, दिव्य मिलन इच्छा के बारे में नहीं, बल्कि विकास से जुड़ा है. यह योग्यता को जानने के बारे में. महाशिवरात्रि पर जब मंदिरों में दीपक की रोशनी टिमटिमाते हैं और शिव से जुड़े मंत्रोच्चार गूंजते हैं, तब इस कथा का गहरा सत्य समझ आता है.

मिलन के कामना करने से पहले खुद को तैयार करो. आशीर्वाद प्राप्त करने से पहले रूपांतरित हो जाओ.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.