Share Market: कल यानी कि बीते गुरुवार को IT स्टॉक्स 5 परसेंट से ज्यादा की गिरावट आई. इसके चलते निफ्टी IT इंडेक्स का हाल बेहाल रहा. यह लगभग 10 महीनों में अपने सबसे निचले लेवल के करीब आ गया.
दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से कंपनियों को नुकसान पहुंचने की संभावनाओं और अमेरिका में रोजगार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आने के बाद US फेडरल रिजर्व के जल्द रेट कट की कम होती उम्मीदों ने मार्केट सेंटिमेंट पर असर डाला. गुरुवार के कारोबारी सेशन में 10-स्टॉक वाला निफ्टी IT इंडेक्स सबसे खराब परफॉर्म करने वाला सेक्टर बनकर उभरा और आईटी कंपनियों के टोटल मार्केट वैल्यू में 1.3 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई.
क्यों IT स्टॉक्स में आई गिरावट?
टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में आई इस भारी-भरकम गिरावट का सबसे ज्यादा असर टेक महिंद्रा, इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी कंपनियों पर पड़ा. इनके शेयर लगभग 6 परसेंट तक लुढ़क गए. इस दौरान BSE मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स में 0.48 परसेंट और स्मॉलकैप सेलेक्ट इंडेक्स में 0.28 परसेंट की गिरावट दर्ज की. हालांकि, सेक्टोरल इंडेक्स में सबसे ज्यादा 5.40 परसेंट की गिरावट निफ्टी IT इंडेक्स में देखी गई.
इन दिनों अमेरिकी AI कंपनी Anthropic और उसका नया टूल क्लाउड कोवर्क निवेशकों के लिए नया सिरदर्द बना हुआ है. खबर है कि यह AI टूल कोडिंग से लेकर मार्केटिंग, लीगल और अकाउंटिंग जैसे काम खुद से कर सकता है, जो काम IT कंपनियां आमतौर पर करती हैं. इससे निवेशकों को चिंता है कि यह IT कंपनियों की मदद करने के बजाय उनकी जगह ले सकता है. उनकी नौकरी पर बात आ सकती है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा, “एंथ्रोपिक शॉक से जूझ रहे टेक स्टॉक्स के जल्द ठीक होने की उम्मीद नहीं है.” कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियों को अपने रेवेन्यू का 40 परसेंट तक का नुकसान हो सकता है क्योंकि AI वह काम करना शुरू कर देगा जो पहले इंसान करते थे. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में जनवरी के रोजगार आंकड़ों में 130,000 नई नौकरियां और 4.3 परसेंट बेरोजगारी दिखाई गई इसलिए शायद फेडरल रिजर्व शायद जल्द ही इंटरेस्ट रेट्स में कटौती न करे, जो टेक स्टॉक्स के लिए बुरी खबर है.
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या IT कंपनियां AI के आगे टिक पाएंगी? LPL फाइनेंशियल के थॉमस शिप कहते हैं, “AI के साथ कॉम्पिटिशन ज्यादा होने का डर है, ज्यादा प्राइसिंग प्रेशर है, और उनके कॉम्पिटिटिव मोट्स कमजोर हो गए हैं, जिसका मतलब है कि उन्हें AI से बदलना आसान हो सकता है.”
मोतीलाल ओसवाल ने चेतावनी दी कि AI पुराने सॉफ्टवेयर और टेस्टिंग को कम जरूरी बना देगा. हालांकि, वे अगले 3-6 महीनों में AI पार्टनरशिप पर नजर रखने का सुझाव देते हैं, जिससे 2026 के मध्य तक नई AI सर्विस डील्स हो सकती हैं.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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