डीयू में शुरू हुआ वंदे मातरम् का पूरा गायन, क्या है इसे लागू करने की डेडलाइन?

सतीश कुमार
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दिल्ली विश्वविद्यालय में इस बार साहित्य उत्सव की शुरुआत एक खास अंदाज में हुई. उद्घाटन सत्र में ‘वंदे मातरम्’ के पूरे छह छंद गाए गए. करीब 3 मिनट 10 सेकंड तक चला यह गायन कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बना. मंच पर मौजूद कुलगुरु प्रो. योगेश सिंह, संस्कृति परिषद के पदाधिकारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र इस क्षण के साक्षी बने. यह पहली बार था जब विश्वविद्यालय के किसी बड़े आयोजन में ‘वंदे मातरम्’ को पूरे छह छंदों के साथ सामूहिक रूप से प्रस्तुत किया गया.

दरअसल, एक दिन पहले ही केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए थे. गृह मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि अब सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य रूप से गाया या बजाया जाएगा. सबसे अहम बात यह है कि गीत के पूरे छह छंद गाए जाएंगे. डीयू ने साहित्य उत्सव में इन नए नियमों का पालन करते हुए पूरा गीत प्रस्तुत किया. इससे साफ संकेत मिला कि अब इस नियम को सख्ती से लागू किया जाएगा.

क्या है लागू करने की डेडलाइन?

गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार यह नियम तुरंत प्रभाव से लागू माना जाएगा. यानी जिस दिन से आदेश जारी हुआ है, उसी दिन से सभी सरकारी संस्थानों और कार्यक्रमों में इसे अपनाना होगा. स्कूलों, कॉलेजों और अन्य सरकारी आयोजनों में अब ‘वंदे मातरम्’ के छह छंद गाना या बजाना अनिवार्य रहेगा. हालांकि सिनेमा हॉल में फिल्मों के दौरान यह नियम लागू नहीं होगा. वहां पहले की तरह व्यवस्था बनी रहेगी.

राष्ट्रगान के बाद होगा ‘वंदे मातरम्’

नए नियमों के तहत सरकारी कार्यक्रमों में पहले राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ होगा और उसके तुरंत बाद ‘वंदे मातरम्’ गाया या बजाया जाएगा. दोनों के दौरान सभी लोगों को खड़े होकर सम्मान देना होगा.

राष्ट्रपति और राज्यपाल के कार्यक्रमों में भी यह गीत बजाया जाएगा. उनके आगमन, प्रस्थान और भाषण से पहले और बाद में भी इसका पालन किया जाएगा. पद्म पुरस्कार जैसे बड़े नागरिक सम्मान समारोहों में भी अब यह गीत अनिवार्य होगा.

क्यों है यह फैसला खास?

‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण गीत है. इसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में लिखा था और बाद में यह उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ. गीत में भारत माता की छवि को सम्मान के साथ प्रस्तुत किया गया है.

1937 में कांग्रेस ने इसके केवल पहले दो छंदों को आधिकारिक रूप से अपनाया था. कुछ छंदों में देवी रूप का उल्लेख होने के कारण उस समय सभी छह छंदों को नहीं अपनाया गया. अब सरकार ने फैसला किया है कि गीत को उसके मूल रूप में, पूरे छह छंदों के साथ प्रस्तुत किया जाएगा.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.