Zero Sugar Drinks: भारत में बढ़ा ‘शुगर-फ्री’ ड्रिंक्स का क्रेज, क्या वाकई सुरक्षित हैं कोक-पेप्सी के ये ड्रिंक्स?

सतीश कुमार
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Are Sugar Free Drinks Really Healthy: 2025 में जीरो और लो-शुगर ड्रिंक्स की बिक्री में तेज उछाल सिर्फ बाजार का ट्रेंड नहीं, बल्कि बदलती हेल्थ प्राथमिकताओं का संकेत भी माना जा रहा है. एक्सपर्ट के मुताबिक, लोग अब शुगर की अधिक मात्रा से होने वाले मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग जैसे खतरों को लेकर ज्यादा जागरूक हो गए हैं. कोका-कोला की कुल बिक्री में जीरो-शुगर ड्रिंक्स की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक पहुंचना इस बदलाव को दर्शाता है. डाइट कोक, कोक जीरो और अन्य नो-शुगर वैरिएंट्स की मांग बढ़ना बताता है कि उपभोक्ता स्वाद से समझौता किए बिना कैलोरी कम करना चाहते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि शक्कर की मात्रा कम करने से वजन नियंत्रण और ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मदद मिल सकती है.

शुगर फ्री डिंक्स की डिमांड

पेप्सीको की भी बिना शुगर और कम शुगर वाली ड्रिंक्स की बिक्री बढ़कर 59 प्रतिशत तक पहुंच गई है. कंपनियों का दावा है कि यह “हेल्दी बेवरेज ऑप्शन” की बढ़ती मांग का परिणाम है. हालांकि एक्पर्ट यह भी स्पष्ट करते हैं कि भले ही इन पेय पदार्थों में शुगर कम हो, लेकिन कृत्रिम मिठास और प्रोसेस्ड तत्वों का संतुलित सेवन जरूरी है. इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में जीरो और लो-शुगर ड्रिंक्स की हिस्सेदारी करीब 5 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 30 प्रतिशत तक पहुंच गई. यह उछाल दर्शाता है कि लोग अब कैलोरी काउंट, लेबल रीडिंग और न्यूट्रिशन वैल्यू पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. टाटा स्टारबक्स जैसे ब्रांड भी शुगर-फ्री फ्लेवर पेश कर रहे हैं, खासकर साल की शुरुआत में जब लोग फिटनेस रिजॉल्यूशन लेते हैं. जेन Z पीढ़ी में फिटनेस और बॉडी इमेज को लेकर जागरूकता ज्यादा है, जिसका असर उनकी ड्रिंक पसंद पर भी दिख रहा है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

कोका-कोला इंडिया और GSK कंज्यूमर हेल्थकेयर के पूर्व मार्केटिंग हेड और इन्वेस्टर श्रीनिवास मूर्ति का मानना है कि भारतीय शहरी मध्यम वर्ग के लिए वेलनेस अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक बड़ा बदलाव  बन चुका है. लोग मजबूरी में भी और अपनी पसंद से भी अब सेहत की ओर मुड़ रहे हैं. इसके साथ ही, भारत की बड़ी युवा आबादी, खासकर जेन-जी , न केवल फिट रहने के लिए बल्कि दिखने में बेहतर लगने के लिए भी हेल्दी लाइफस्टाइल चुन रही है, जिसका सीधा असर अब ड्रिंक्स की बिक्री के आंकड़ों में दिखने लगा है.”

क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट?

हेल्थ से जुड़े विषयों पर जानकारी देने वाली Penn Dental Family Practice की रिपोर्ट के अनुसार, भले ही शुगर-फ्री ड्रिंक्स में कैलोरी कम हो, लेकिन ये पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. इनमें मौजूद एसिड दांतों के इनेमल को नुकसान पहुंचाता है और आर्टिफिशियल मिठास वजन बढ़ने और दिल की बीमारियों का खतरा पैदा कर सकती है. बेहतर सेहत के लिए इनका सेवन सीमित करें और हाइड्रेशन के लिए पानी को ही प्राथमिकता दें.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.