सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसने लोगों के दिलों को झकझोर कर रख दिया है. यह वीडियो प्लेटफ़ॉर्म X पर साझा किया गया, जिसमें एक बेटे ने अपनी मां के स्वास्थ्य बीमा के लिए हर साल 50,000 रुपये का प्रीमियम भरा.
जब उनकी मां गंभीर बीमारी की चपेट में आईं, तो बेटे को उम्मीद थी कि बीमा पॉलिसी उनके काम आएगी, लेकिन बेटे ने जो सोचा था, ठीकउसका उल्टा हुआ. उन्होंने दावा निपटान के लिए बीमाकर्ता के कार्यालय में जाकर निराशाजनक और चौंकाने वाला अनुभव साझा किया है जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.
दावा प्रक्रिया ने उठाए सवाल
🚨 एक बेटा अपनी मां के इलाज के लिए हर साल ₹50,000 प्रीमियम भरता रहा भरोसा था कि जरूरत पर साथ मिलेगा।
मां बीमार हुई तो वह स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस के लखनऊ ऑफिस पहुंचा।
घंटों इंतजार कराया गया।
फिर क्लेम से इनकार।
ऊपर से एजेंट का जवाब “हमसे पूछकर पॉलिसी थोड़ी ली थी।”सवाल… pic.twitter.com/rWQNZXq4mz
— खुरपेंची स्वास्थ्य (@Khurpenchhealth) February 15, 2026
वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें घंटों इंतजार कराया गया और उनका दावा खारिज कर दिया गया. यहां तक कि उन्होंने बताया कि एक एजेंट ने कहा, “हमसे पूछकर पॉलिसी थोड़ी ली थी.” इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ दी है कि क्या केवल स्वास्थ्य बीमा लेना पर्याप्त है, या असली संघर्ष तब शुरू होता है जब दावा किया जाता है.
जनता का गुस्सा और प्रतिक्रियाएं
इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर यूजर्स के कमेंट्स के बाढ़ आ गए हैं. एक यूजर ने लिखा कि बीमा कंपनियों का “केवल एक काम है — पैसा जमा करना,” और वे लोगों को गुमराह करते हैं.
दूसरे यूजर ने सरकारी अधिकारियों को टैग करते हुए हस्तक्षेप की मांग की. वहीं एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की कि वह आठ साल से लगभग 80,000 रुपये प्रीमियम भर रहे हैं और डर जताया कि क्या उन्हें भी दवा के समय इसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा.
स्वास्थ्य बीमा: सुरक्षा या केवल कागज़ का वादा?
इस वायरल पोस्ट ने यह सवाल उठाया है कि क्या स्वास्थ्य बीमा वास्तव में सुरक्षा प्रदान करता है, या यह केवल कागज़ पर लिखी गई पॉलिसी बनकर रह गया है. उपयोगकर्ताओं का गुस्सा, अविश्वास और डर स्पष्ट है, और यह घटना समाज में बीमा कंपनियों की पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर बहस को तेज कर रही है.

