Chini kaise banti hai : जानिए पूरा प्रोसेस (Factory से Kitchen तक)

सतीश कुमार
14 Min Read

क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी चाय या मिठाई में डाली जाने वाली वो मीठी, सफेद चीनी (Sugar) आखिर बनती कैसे है? गन्ने (Sugarcane) के लंबे-लंबे डंठल से लेकर आपकी किचन में रखे डिब्बे तक का यह सफर बेहद दिलचस्प और वैज्ञानिक है।

बहुत से लोग सोचते हैं कि चीनी सीधे फैक्ट्री में ही बन जाती है, लेकिन यह प्रक्रिया (Processing) इतनी आसान नहीं है। इसमें कई चरणों (Stages) से होकर गुजरना पड़ता है, जिसके बाद यह हमारे उपयोग के लायक बनती है।

इस लेख में हम “चीनी कैसे बनती है – पूरा प्रोसेस” को विस्तार से समझेंगे। आप जानेंगे कि गन्ने की खेती कैसे होती है, उसका रस कैसे निकाला जाता है, और आखिरकार वह रस ठोस चीनी के क्रिस्टल में कैसे बदल जाता है। तो चलिए, इस मीठे सफर (Sweet Journey) की शुरुआत करते हैं।


चीनी का इतिहास: गन्ने से शुरू हुआ मीठा सफर (History of Sugar)

चीनी का इतिहास हजारों साल पुराना है। माना जाता है कि इसकी शुरुआत न्यू गिनी (New Guinea) से हुई, जहां से गन्ना (Sugarcane) भारत और चीन पहुंचा। प्राचीन भारत और चीन में ही सबसे पहले गन्ने के रस को उबालकर उसके क्रिस्टल बनाने की तकनीक विकसित की गई थी। भारत में इसे “खंड” (Khand) कहा जाता था, जिससे अंग्रेजी का शब्द “Candy” भी बना है।

धीरे-धीरे यह ज्ञान फारस और फिर यूरोप पहुंचा। आज भारत, ब्राजील और चीन दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश हैं। भारत में गन्ने की खेती उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर होती है। [Encyclopaedia Britannica’s article on the history of sugar] यहाँ पढ़े


चीनी बनाने का मुख्य स्रोत: गन्ना (Sugarcane) और चुकंदर (Sugar Beet)

हालांकि चीनी कई पौधों में प्राकृतिक रूप से पाई जाती है, लेकिन व्यावसायिक रूप से इसे मुख्यतः दो फसलों से बनाया जाता है:

  1. गन्ना (Sugarcane): यह एक प्रकार की लंबी घास है, जो 10 से 20 फीट तक ऊंची हो सकती है। यह मुख्यतः उष्णकटिबंधीय (Tropical) और उपोष्ण कटिबंधीय (Subtropical) क्षेत्रों में उगाया जाता है। गन्ने के तने में ही सबसे ज्यादा मीठा रस (Sucrose) पाया जाता है। इसका उपयोग भारत, ब्राजील और चीन में सबसे अधिक किया जाता है।

  2. चुकंदर (Sugar Beet): यह एक जड़ वाली सब्जी है, जो ठंडे इलाकों (Temperate regions) में उगाई जाती है। इसकी सफेद जड़ (White Root) में भी भरपूर मात्रा में शुगर पाई जाती है। फ्रांस, जर्मनी और रूस जैसे देश मुख्यतः चुकंदर से चीनी बनाते हैं। इन दोनों से निकलने वाली चीनी (Sucrose) रासायनिक रूप से एक जैसी ही होती है।


चीनी बनाने की प्रक्रिया: गन्ने से लेकर चीनी के दाने तक (Sugar Making Process Step by Step)

अब हम सबसे महत्वपूर्ण भाग पर आते हैं: चीनी कैसे बनती है – पूरा प्रोसेस। एक चीनी मिल (Sugar Mill) या रिफाइनरी में यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है।

चरण 1: गन्ने की कटाई और तैयारी (Harvesting & Preparation)

चीनी बनाने की शुरुआत खेतों से होती है। जब गन्ना पूरी तरह पक जाता है, तो इसे किसानों द्वारा हाथों या मशीनों से काटा जाता है। कटाई के बाद, गन्ने के पत्तों और ऊपरी हिस्से को हटा दिया जाता है। फिर इन डंठलों को जल्द से जल्द चीनी मिल (Factory) में भेज दिया जाता है ताकि रस सूख न जाए और उसकी मिठास बरकरार रहे। मिल में पहुंचने पर सबसे पहले गन्ने को उच्च दबाव वाले पानी से अच्छी तरह धोया जाता है ताकि मिट्टी, धूल और पत्थर साफ हो जाएं।

चरण 2: क्रशिंग और रस निकालना (Crushing & Juice Extraction)

साफ गन्नों को अब बड़ी-बड़ी क्रशिंग मशीनों (Heavy Rollers) में डाला जाता है। ये मशीनें गन्ने को जोर से दबाती हैं और उसका सारा रस (Juice) निकाल लेती हैं। इस प्रक्रिया को क्रशिंग कहते हैं। निकलने वाले रस को गन्ने का रस कहा जाता है। बचे हुए रेशेदार हिस्से को खोई (Bagasse) कहते हैं।

  • खोई का उपयोग: यह खोई बेकार नहीं जाती। इसका उपयोग चीनी मिल में ही ईंधन (Fuel) के रूप में किया जाता है, जिससे बॉयलर में आग जलाई जाती है। इससे बिजली भी बनाई जाती है। कुछ जगहों पर इसका उपयोग कागज (Paper) और बायो-प्लास्टिक बनाने में भी होता है।

चरण 3: रस की सफाई (Clarification & Purification)

गन्ने का निकला हुआ रस साफ नहीं होता। उसमें मिट्टी, रेशे और अन्य अशुद्धियां मिली होती हैं। इसे साफ करने के लिए रस को गर्म किया जाता है और उसमें चूना (Lime) मिलाया जाता है। चूना मिलाने से अशुद्धियां जमकर ऊपर तैरने लगती हैं, जिन्हें आसानी से हटाया जा सकता है। इसके बाद रस को बड़े टैंकों में से गुजारा जाता है, जहां से सारी अशुद्धियां अलग हो जाती हैं और एक साफ, पतला रस (Clear Juice) बचता है। इस प्रक्रिया को क्लेरिफिकेशन कहते हैं।

चरण 4: गाढ़ा करना (Evaporation)

अब साफ किए गए पतले रस में से अतिरिक्त पानी निकालना होता है। इसके लिए रस को बहु-प्रभावी बाष्पित्र (Multiple Effect Evaporator) नामक मशीन में डाला जाता है। यहां रस को उबाला जाता है, जिससे उसका पानी भाप बनकर उड़ जाता है और रस गाढ़ा होकर सिरप (Syrup) में बदल जाता है।

चरण 5: क्रिस्टलाइजेशन (Crystallization)

गाढ़े हुए सिरप को अब बड़े-बड़े वैक्यूम पैन (Vacuum Pans) में डाला जाता है। यहां इसे फिर से उबाला जाता है और फिर धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान चीनी के छोटे-छोटे दाने (Crystals) बनने शुरू हो जाते हैं। यह प्रक्रिया बहुत नियंत्रित तरीके से की जाती है ताकि क्रिस्टल सही आकार के बन सकें।

चरण 6: सेंट्रीफ्यूजिंग (Centrifuging)

जब सारे क्रिस्टल बन जाते हैं, तो इस मिश्रण (जिसे मैसक्यूइट कहते हैं) को एक तेज गति से घूमने वाली मशीन, जिसे सेंट्रीफ्यूजल मशीन (Centrifugal Machine) कहते हैं, में डाला जाता है। यह मशीन एक कपड़े की जाली वाला ड्रम होता है। तेज गति से घूमने पर चीनी के ठोस क्रिस्टल जाली में फंसे रह जाते हैं और उनके ऊपर चिपका हुआ गाढ़ा, भूरा तरल पदार्थ (जिसे शीरा या मोलासेस (Molasses) कहते हैं) बाहर निकल जाता है।

  • यहीं पर सफेद और भूरी चीनी में फर्क पड़ता है: इस स्तर पर जो पहली बार चीनी निकलती है, वह भूरी (Brown Sugar) होती है। अगर इसी भूरे क्रिस्टल को फिर से पिघलाकर, साफ करके और क्रिस्टलाइज किया जाता है, तो शुद्ध सफेद चीनी (White Sugar) मिलती है।

चरण 7: सुखाना और ठंडा करना (Drying & Cooling)

सेंट्रीफ्यूज से निकली हुई गीली चीनी को अब गर्म हवा वाली मशीनों में सुखाया जाता है। इसके बाद इसे ठंडा किया जाता है, ताकि दाने आपस में चिपकें नहीं।

चरण 8: पैकिंग और वितरण (Packaging & Distribution)

सूखी और ठंडी चीनी को अलग-अलग आकार के दानों (जैसे फाइन, एक्स्ट्रा फाइन, क्रिस्टल) के हिसाब से छाना जाता है। फिर इसे मशीनों द्वारा स्वचालित तरीके से पैक किया जाता है – छोटे पैकेट से लेकर बड़ी बोरियों तक में। यह पैक्ड चीनी अब दुकानों और हमारी रसोई तक पहुंचने के लिए तैयार है।


सफेद चीनी (Refined Sugar) बनाम भूरी चीनी (Brown Sugar)

आपने अक्सर देखा होगा कि बाजार में सफेद के अलावा भूरी चीनी भी मिलती है। दोनों में क्या अंतर है?

  • सफेद चीनी (White Sugar): यह सबसे शुद्ध रूप है। इसे पूरी तरह रिफाइन किया जाता है, जिससे सारा शीरा (Molasses) निकल जाता है। यह 99.9% शुद्ध सुक्रोज (Sucrose) होता है। [USDA FoodData Central entry for sugar, granulated] के अनुसार यह सबसे शुद्ध खाद्य पदार्थों में से एक है।

  • भूरी चीनी (Brown Sugar): यह या तो अपरिष्कृत (Unrefined) होती है, जिसमें कुछ मात्रा में शीरा बचा रह जाता है, या फिर इसे सफेद चीनी में थोड़ा सा शीरा मिलाकर बनाया जाता है। शीरे की मौजूदगी के कारण यह नम (Moist) और चिपचिपी होती है और इसका स्वाद कारमेल जैसा होता है।


चीनी के प्रकार (Different Types of Sugar)

दाने के आकार के आधार पर भी चीनी कई प्रकार की होती है:

  • एक्स्ट्रा फाइन / फाइन ग्रैन्युलेटेड शुगर: यह सबसे आम चीनी है, जो घरों में इस्तेमाल होती है। इसके दाने बहुत बारीक होते हैं।

  • कास्टर शुगर (Caster Sugar): यह दानों में सामान्य चीनी से भी बारीक होती है, जल्दी घुल जाती है, इसलिए बेकिंग और कॉकटेल में इस्तेमाल होती है।

  • कन्फेक्शनर्स शुगर / पाउडर शुगर: यह चीनी को बारीक पीसकर और उसमें थोड़ा सा कॉर्नस्टार्च मिलाकर बनाई जाती है, ताकि वह फटे नहीं। इसका उपयोग आइसिंग और मिठाइयों पर सजावट के लिए होता है।

  • रॉक शुगर / मिश्री (Rock Sugar/Candy Sugar): इसे बहुत धीमी गति से क्रिस्टलाइज करके बनाया जाता है, जिससे बहुत बड़े, पारदर्शी क्रिस्टल बनते हैं। इसका उपयोग आयुर्वेद और कफ सिरप में होता है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs on “Chini Kaise Banti Hai”)

1. चीनी बनाने के लिए किस पौधे का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है?
दुनिया में सबसे ज्यादा चीनी गन्ना (Sugarcane) और चुकंदर (Sugar Beet) से बनाई जाती है। गन्ने का इस्तेमाल भारत और ब्राजील जैसे गर्म देशों में होता है, जबकि चुकंदर से यूरोप के ठंडे देशों में चीनी बनाई जाती है।

2. गन्ने का रस आखिर ठोस चीनी में कैसे बदल जाता है?
यह एक भौतिक और रासायनिक प्रक्रिया है। रस को उबालकर उसका पानी सुखाया जाता है (Evaporation), जिससे वह गाढ़ा हो जाता है। फिर इस गाढ़े सिरप को ठंडा करने और उसमें चीनी के छोटे-छोटे बीज (Seed Crystals) डालने से चीनी के क्रिस्टल बनने लगते हैं (Crystallization)।

3. क्या चीनी में कोई केमिकल मिलाया जाता है?
प्राकृतिक चीनी (गन्ने या चुकंदर से) बनाने की प्रक्रिया में केवल सफाई के लिए थोड़ा सा चूना (Lime) मिलाया जाता है, जो बाद में पूरी तरह हट जाता है। सफेद चीनी को पूरी तरह से साफ (Refine) किया जाता है, इसलिए यह शुद्ध और प्राकृतिक है। हालांकि, पिसी हुई चीनी (Icing Sugar) में फटने से बचाने के लिए थोड़ा सा कॉर्नस्टार्च मिलाया जाता है।

4. चीनी बनाने के बाद बचे हुए गन्ने (खोई) का क्या होता है?
बचे हुए रेशे (खोई) को बेकार नहीं फेंका जाता। इसका उपयोग चीनी मिलों में ही ईंधन के रूप में किया जाता है, जिससे बिजली बनती है। साथ ही, इससे कागज, बायो-फ्यूल और पर्यावरण के अनुकूल बर्तन (Eco-friendly products) भी बनाए जाते हैं।

5. क्या फलों में मौजूद शुगर और बाजार की सफेद चीनी एक समान है?
रासायनिक रूप से दोनों में अंतर है। फलों में मौजूद शुगर फ्रुक्टोज (Fructose) होती है, जो फाइबर, विटामिन और पानी के साथ मिली होती है। जबकि सफेद चीनी सुक्रोज (Sucrose) होती है, जो प्रोसेसिंग के दौरान बाकी पोषक तत्वों से अलग कर दी जाती है, इसलिए इसमें सिर्फ कैलोरी होती है।

6. क्या घर पर गन्ने से चीनी बनाई जा सकती है?
घर पर व्यावसायिक रूप से मिलने वाली सफेद चीनी बनाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि इसके लिए भारी मशीनरी और केमिकल-फ्री प्रोसेस की जरूरत होती है। हां, गन्ने के रस को उबालकर गुड़ (Jaggery) जरूर बनाया जा सकता है, जो एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है।


निष्कर्ष (Conclusion)

तो यह थी हमारी मीठी यात्रा की कहानी “चीनी कैसे बनती है – पूरा प्रोसेस”। खेत में लहलहाते गन्ने से लेकर हमारी रसोई तक पहुंचने में चीनी कई चरणों से होकर गुजरती है, और हर चरण में उसे साफ और शुद्ध बनाने की पूरी कोशिश की जाती है।

हालांकि चीनी हमारे खाने का स्वाद बढ़ाती है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अत्यधिक चीनी का सेवन मोटापा, डायबिटीज और दांतों की सड़न जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। [WHO guideline on sugar intake] के अनुसार, एक वयस्क को अपनी कुल कैलोरी का 10% से भी कम हिस्सा मुक्त शर्करा (Free Sugars) से लेना चाहिए।

उम्मीद है कि इस विस्तृत लेख ने आपके सभी सवालों के जवाब दे दिए होंगे। अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर शेयर करें!

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.