अगर आप Google Chrome यूजर हैं तो अलर्ट हो जाने की जरूरत है. सरकारी एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने वार्निंग जारी करते हुए कहा है कि इस ब्राउजर में कई सिक्योरिटी खामियां मिली हैं, जिससे विंडोज, macOS और Linux पर गूगल क्रो यूज करने वालों पर साइबर अटैक का खतरा है. इन खामियों का फायदा उठाकर अटैकर्स आपके सिस्टम की एक्सेस ले सकते हैं, जिससे पर्सनल इंफोर्मेशन के साथ-साथ डेटा चोरी का भी डर बना हुआ है.
Google Chrome के किस वर्जन पर ज्यादा खतरा?
अगर आप विंडोज या मैक पर गूगल क्रोम के 145.0.7632.75/76 से पुराने और Linux पर 144.0.7559.75 से पुराने वर्जन का यूज कर रहे हैं तो आपको चिंता करने की जरूरत है. एजेंसी को क्रोम के इन वर्जन में खामियां मिली हैं. इसलिए अब भी इन वर्जन का यूज करने वाले यूजर्स पर रिमोट अटैक हो सकता है. एजेंसी का कहना है कि क्रोम के CSS रेंडरिंग कंपोनेंट में ये खामियां पाई गई हैं. इनका फायदा उठाकर अटैकर्स ब्राउजर के अंदर मेमोरी हैंडलिंग को मैनिपुलेट कर सकते हैं. इस तरीके से वो पूरे सिस्टम की एक्सेस अपने हाथों में लेकर डेटा चोरी और सर्विस डिसरप्शन कर सकते हैं.
बड़े खतरे से निपटने के लिए यूजर्स क्या करें?
एजेंसी ने इस वार्निंग को हाई रिस्क कैटेगरी में रखा है, जिससे पता चलता है कि यह खतरा काफी बड़ा है. इससे निपटने के लिए यूजर्स को क्रोम ब्राउजर अपडेट करने की सलाह दी गई है. यूजर्स और ऑर्गेनाइजेशन को गूगल स्टेबल चैनल के जरिए रिलीज हुई अपडेट को इंस्टॉल कर सकते हैं. इस अपडेट में इन खामियों को ठीक करने के लिए सिक्योरिटी पैचेज जारी किए गए हैं. आमतौर पर भी यूजर्स को अपने डिवाइस और सॉफ्टवेयर को अपडेटेड रखने की सलाह दी जाती है. इससे उन्हें साइबर अटैक से भी सुरक्षा मिलती है और नए फीचर्स भी मिलते रहते हैं.
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