Tarique Rahman Oath: ढाका की गलियों में आज सिर्फ हलचल नहीं, एक गहरी बेचैनी महसूस की जा सकती है. 17 फरवरी 2026 की शाम 4:00 बजे जब तारिक रहमान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे, तो वह दो दशक के राजनीतिक सूखे को तो समाप्त करेंगे, लेकिन जिस ‘मुहूर्त’ में वह सत्ता की बागडोर संभाल रहे हैं, वह किसी दलदल से कम नहीं दिखती. सत्ता दरवाजे पर खड़ी है, पर असली यक्ष प्रश्न यह है कि दरवाजा खुलने के बाद यह रास्ता स्थिरता की ओर जाएगा या अंतहीन संघर्ष की ओर?
जनादेश ने उन्हें जीत का सेहरा तो पहना दिया है, लेकिन असल चुनौती इस ऐतिहासिक परिवर्तन को टिकाए रखने की है. बांग्लादेश इस समय रिक्त राजकोष, विदेशी शक्तियों के दबाव और तीखे राजनीतिक ध्रुवीकरण के एक खतरनाक त्रिकोण में फंसा है.
मेदिनी ज्योतिष और मुहूर्त सिद्धांतों के गहन विश्लेषण से स्पष्ट है कि यह समय किसी उत्सव का नहीं, बल्कि एक बड़े नीतिगत और रणनीतिक संघर्ष का ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है. क्या 17 फरवरी का यह ‘राज्याभिषेक’ अपनी नींव में छिपे ज्योतिषीय दोषों को मात दे पाएगा? जानते हैं:
सूर्य ग्रहण का शाप: ग्रहण के साये में राज्याभिषेक !
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला और डरावना तथ्य यह है कि 17 फरवरी 2026 को वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) लग रहा है. ज्योतिष शास्त्र में इसे ‘राजभंग’ का सबसे बड़ा संकेत माना गया है.
मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, यदि शपथ के दिन ही सूर्य को ग्रहण लग जाए, तो वह सत्ता कभी सुख और शांति से शासन नहीं कर पाती. भले ही यह ग्रहण बांग्लादेश में पूर्ण रूप से दिखाई न दे, लेकिन ब्रह्मांडीय गणना के अनुसार सूर्य (राजा) और चंद्रमा (जनता) दोनों ही राहु के चंगुल में रहेंगे.
इतिहास गवाह है कि ग्रहण के साये में होने वाले सत्ता परिवर्तन अक्सर ‘अधूरे’ या ‘अल्पायु’ साबित होते हैं. सूर्य पर लगा यह दाग तारिक रहमान की साख पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े करेगा. यह एक ऐसी शुरुआत है जहां सूरज के उगते ही उस पर अंधेरा छाने की तैयारी हो चुकी है.
मुहूर्त का संकेत: ‘अंधेरे’ में नई शुरुआत
ज्योतिष ग्रंथ ‘मुहूर्त चिंतामणि’ के अनुसार, किसी भी राष्ट्र के मुखिया की शपथ ही उस देश की अगली किस्मत लिखती है. 17 फरवरी 2026 का समय तीन तकनीकी रूप से बेहद विवादित है:
- अमावस्या का साया: यह दिन अमावस्या का है. ज्योतिष में इसे समापन का बिंदु माना जाता है, रोशनी का नहीं. इसका मतलब साफ है—नई सरकार को विरासत में सिर्फ मलबा और अविश्वास मिलेगा. यह विकास के उत्सव का समय नहीं, बल्कि पुराने घावों को भरने की जद्दोजहद होगी.
- राहुकाल की मार: शपथ का समय राहुकाल के घेरे में है. राहु यानी भ्रम, प्रोपेगेंडा और सोशल मीडिया का मायाजाल. सरकार की पहली लड़ाई नीतियों से ज्यादा अपनी ‘छवि’ बचाने की होगी. विपक्ष डिजिटल मंचों पर इतना आक्रामक रहेगा कि सरकार को सांस लेने की फुर्सत नहीं मिलेगी.
- परिघ योग का रोड़ा: ‘परिघ’ का अर्थ होता है बाधा. इस योग में शुरू किया गया काम प्रशासनिक सुस्ती और कानूनी झमेलों में ऐसा फंसता है कि फाइलें दफ्तरों से बाहर ही नहीं निकल पातीं.
शपथ ग्रहण के समय की कुंडली और अष्टम भाव में ग्रहों का जमावड़ा
17 फरवरी की कुंडली कर्क लग्न की है. कर्क एक ‘चर’ राशि है, जो स्वभाव से ही अस्थिर और चंचल है. सबसे डरावना संकेत कुंडली का आठवां घर (कुंभ राशि) दे रहा है. यहां सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र और राहु एक साथ कुंडली मार कर बैठे हैं. ज्योतिष में आठवां भाव ‘गुप्त षड्यंत्रों’ और ‘अचानक आने वाले संकटों’ का है. इसका मतलब है कि असली दुश्मन बाहर नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों में छिपे होंगे.
मंगल सातवें भाव में उच्च का होकर ‘रुचक योग’ तो बना रहा है, लेकिन वह ‘अस्त’ है. यानी सरकार बाहर से तो बहुत सख्त और ताकतवर दिखेगी, लेकिन अंदर से उसके फैसले कमजोर होंगे. सेना या पुलिस का ज्यादा इस्तेमाल करना अंत में सरकार पर ही भारी पड़ेगा.
खजाना खाली और शक्ति की कमी
कुंडली के अष्टकवर्ग का गणित बताता है कि सरकार की जेब और ताकत कैसी रहेगी. सत्ता भाव में सिर्फ 20 अंक. सिंह राशि (सत्ता भाव) में इतने कम अंक होना इस बात की पक्की भविष्यवाणी है कि राजकोष खाली है. विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और बैंकिंग संकट नई सरकार की कमर तोड़ सकता है.
छठे भाव (विरोधियों का घर) में अंकों की अधिकता बताती है कि सरकार अपनी ऊर्जा विकास के बजाय कोर्ट-कचहरी और आंतरिक बगावत को शांत करने में बर्बाद करेगी.
बांग्लादेश की आम जनता का क्या होगा?
वहां की जनता के लिए यह दौर किसी ‘हनीमून पीरियड’ जैसा नहीं होने वाला. महंगाई कम होने के आसार नहीं हैं. तारिक रहमान के ‘फैमिली कार्ड’ और रोजगार के वादे बजट की कमी के कारण कछुए की चाल चलेंगे. जनता को मुफ्त सुविधाओं के बदले कड़े टैक्स और सब्सिडी में कटौती का कड़वा घूंट पीना होगा.
सरकार कानून-व्यवस्था सुधारने के लिए डंडा तो चलाएगी, लेकिन राजनीतिक बदले की भावना आम आदमी के मन में असुरक्षा पैदा करेगी. अल्पसंख्यक समुदायों के लिए यह वक्त बहुत संभलकर चलने का है. 2024 की क्रांति वाले युवा और पुराने राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक जंग ढाका की सड़कों पर बार-बार ‘जन आंदोलन’ की शक्ल लेगी, ऐसे संकेत मिल रहे हैं.
भारत के साथ संबंध
दिल्ली और ढाका के रिश्ते अब ‘लेन-देन’ पर टिके होंगे. राष्ट्रवादी सुर ऊंचे होने से तीस्ता पानी और सीमा विवाद जैसे मुद्दे फिर से गर्म होंगे. चीन का जाल और पश्चिम का दबाव देखने को मिल सकते हैं. राहु का प्रभाव बताता है कि बांग्लादेश चीन के कर्ज और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों (Sanctions) के बीच बुरी तरह फंसेगा.
सबसे बड़ी भविष्यवाणी: 2027 का महासंकट और दोबारा चुनाव !
अभी मंगल की महादशा चल रही है, जो सख्ती का समय है. लेकिन असली परीक्षा बांग्लादेश की अक्टूबर 2027 में शुरू होगी. अक्टूबर 2027 में जैसे ही राहु की महादशा आएगी, अष्टम भाव की विनाशकारी ताकतें जाग जाएंगी. ज्योतिष के अनुसार, लग्नेश का राहु के साथ अष्टम में होना किसी बड़े संवैधानिक संकट या तख्तापलट की ओर इशारा करता है.
ग्रहों की चाल बता रही है कि 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत में देश ऐसे मोड़ पर खड़ा होगा जहां दोबारा चुनाव (Mid-term Elections) ही एकमात्र रास्ता बचेगा. यह सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने के लिए बहुत संघर्ष करेगी.
प्राकृतिक आपदा आग में करेंगे घी काम!
धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव शपथ के शुरुआती महीनों में ही किसी बड़े चक्रवात या भूकंप का संकेत देता है, जो सरकार की पहली अग्निपरीक्षा होगी.
वहीं सत्ता भले ही पुरुषों के हाथ में हो, लेकिन इस कुंडली में शुक्र की स्थिति बताती है कि किसी महिला का विरोध या उसका अचानक उभरना इस सरकार की नींव हिला देगा.
ग्रहों की स्थिति यहां एक विशेष संकेत को भी दर्शा रही है. यह इतिहास की पहली ऐसी सरकार हो सकती है जिसे ‘साइबर वॉर’ और ‘डीप-फेक’ तकनीक से अस्थिर करने की कोशिश की जाएगी.
बांग्लादेश एक अस्थिर सफर की शुरुआत
कुल मिलाकर ज्योतिष के गहरे संकते बता रहे हैं कि ढाका की हवा में जो प्रतीक्षा है, वह सिर्फ समारोह की नहीं, बल्कि एक धुंधले भविष्य की है. 17 फरवरी 2026 की यह शपथ कोई आसान शुरुआत नहीं है. यह संघर्ष के बीच सत्ता का योग है.
मेदिनी ज्योतिष कहता है कि यह सरकार एक ‘संक्रमण काल’ (Transition Period) का हिस्सा है. अगर नेतृत्व ने बदले की राजनीति छोड़कर आर्थिक सुधारों पर ध्यान नहीं दिया, तो राहु की काली छाया देश को फिर से अस्थिरता की आग में झोंक सकती है. वक्त का इशारा साफ है, यह अध्याय छोटा होगा, पर बहुत दर्दनाक.
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